Ashwini Vaishnaw urges states to cooperate on projects, Railways not a matter of politics
नई दिल्ली
रेल मंत्रालय की ज़िम्मेदारी राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मामला है जो आम नागरिक को उन सेवाओं से जोड़ता है जो सरकारें मुहैया करा सकती हैं। यह बात रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कही। सदन को संबोधित करते हुए मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह "हर पार्टी और हर राज्य सरकार का कर्तव्य" है कि वे रेल परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सक्रिय कदम उठाएं, ताकि देश के आम नागरिकों को न्याय मिल सके।
क्षेत्रीय देरी से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि राष्ट्रीय रेल सेवा की प्रगति राजनीतिक जुड़ाव के बजाय वास्तविक सहयोग पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, "सच तो यह है कि विपक्ष शासित कई अन्य राज्य भी ज़मीन अधिग्रहण में पूरा सहयोग कर रहे हैं। ये तथ्य हैं जो मैंने आपके सामने रखे हैं।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जिन क्षेत्रों में राज्य सरकारों ने इन पहलों का समर्थन किया, वहाँ काम सुचारू रूप से आगे बढ़ा, और यह भी कहा कि "इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता।"
सुरक्षा उपायों के बारे में विस्तार से बताते हुए मंत्री ने समझाया कि वंदे भारत ट्रेन में "कई सुरक्षा विशेषताएं हैं जो इस ट्रेन का ही हिस्सा हैं।" उन्होंने बताया कि कोचों को आपस में जोड़ने के पारंपरिक तरीके को अब सेमी-परमानेंट कपलर से बदल दिया गया है। इस बदलाव से यह सुनिश्चित होता है कि "पूरी ट्रेन अब एक इकाई बन जाती है," जिसे उन्होंने सुरक्षा के लिहाज़ से "एक बहुत बड़ा कदम" बताया।
इसके अलावा, उन्होंने 'एंटी-क्लाइंबिंग' (एक-दूसरे पर चढ़ने से रोकने वाली) सुविधा की शुरुआत पर भी प्रकाश डाला और कहा, "वंदे भारत ट्रेन में हमने जो दूसरी बड़ी सुरक्षा सुविधा शुरू की है, वह है एंटी-क्लाइंबिंग सुविधा। यह एक बहुत ही तकनीकी चीज़ है। जब भी कोचों को आपस में जोड़ा जाता है, तो पूरी दुनिया में प्रचलित नवीनतम तकनीक एंटी-क्लाइंबिंग सुविधा ही है, ताकि एक कोच दूसरे कोच के ऊपर न चढ़ सके।"
केरल में रेल नेटवर्क के संबंध में मंत्री ने कहा कि "केरल की समस्या का समाधान मुख्य रूप से उत्तर से दक्षिण तक रेल क्षमता बढ़ाकर ही किया जा सकता है।" उन्होंने कई प्रमुख क्षमता विस्तार परियोजनाओं का ज़िक्र किया, जिन पर वर्तमान में 'विस्तृत परियोजना रिपोर्ट' (DPR) के रूप में काम चल रहा है। इन परियोजनाओं में कासरगोड से शोरनूर, एर्नाकुलम, कायमकुलम, तिरुवनंतपुरम और पालक्काड-कोयंबटूर खंड शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ज़्यादातर सेवाओं की शुरुआत आठ कोच के साथ हुई थी, ताकि रूट को सेट किया जा सके। इसके बाद मंत्रालय ने "मांग के हिसाब से कोच की संख्या बढ़ाकर 16 या 20 करने" पर काम किया।
वैष्णव ने सदन को यह भी बताया कि "वंदे भारत ट्रेन पर पत्थर फेंकने" में शामिल लोगों को ट्रेन में लगे कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पकड़ा जा रहा है। एक मामले का ज़िक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि "वंदे भारत ट्रेन के कैमरे में कैद हुई उस व्यक्ति की बहुत छोटी सी तस्वीर" की मदद से अधिकारी अपराधी की पहचान कर पाए। उन्होंने सदन को बताया, "उस तस्वीर और कुछ AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके हम ठीक उसी घर तक पहुँच पाए जहाँ वह व्यक्ति रहता था।" इसके साथ ही उन्होंने रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा के लिए उठाए गए तकनीकी कदमों पर भी ज़ोर दिया।
मंत्री ने विपक्ष के सदस्यों का भी शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने यह माना कि "वंदे भारत को लोगों ने बहुत पसंद किया है।" उन्होंने नज़रिए में आए इस बदलाव को देश के विकास के लिए "बहुत ही स्वागत योग्य बात" बताया। वैष्णव ने आगे कहा, "इसी तरह देश आगे बढ़ेगा।"