प्रज्ञानानंद ने रचा इतिहास, पहली बार जीता ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स खिताब

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 28-08-2026
Praggnanandhaa makes history, wins Grand Chess Tour Finals title for the first time.
Praggnanandhaa makes history, wins Grand Chess Tour Finals title for the first time.

 

सेंट लुइस (मिसौरी),

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद ने शानदार वापसी करते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने अमेरिका के दिग्गज ग्रैंडमास्टर फैबियानो करूआना को फाइनल मुकाबले में हराकर पहली बार ग्रैंड चेस टूर फाइनल्स का खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ प्रज्ञानानंद यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। उन्हें खिताब के साथ 2 लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि भी मिली।

गुरुवार को सेंट लुइस में खेले गए फाइनल मुकाबले में प्रज्ञानानंद शुरुआत में करूआना से छह अंक पीछे थे। ऐसे में भारतीय खिलाड़ी के सामने चुनौती बेहद कठिन थी। लेकिन प्रज्ञानानंद ने जबरदस्त जुझारूपन दिखाते हुए मुकाबले का रुख ही बदल दिया।

उन्होंने रैपिड के दोनों गेम जीतकर बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद ब्लिट्ज में करूआना ने वापसी की कोशिश की, लेकिन प्रज्ञानानंद ने मुकाबले को बराबरी पर रोकते हुए अपनी बढ़त कायम रखी। अंततः भारतीय ग्रैंडमास्टर ने 15-13 के स्कोर से फाइनल अपने नाम कर लिया।

छह अंक से पिछड़ने के बाद पलटा पूरा मुकाबला

प्रज्ञानानंद के लिए फाइनल की शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं रही थी। दिन की शुरुआत में वह करूआना से छह अंक पीछे थे। ऐसे में खिताब की दौड़ में बने रहने के लिए उन्हें लगभग असाधारण प्रदर्शन की जरूरत थी।

भारतीय ग्रैंडमास्टर ने रैपिड के दोनों मुकाबलों में शानदार खेल दिखाया और लगातार दो जीत दर्ज कर छह अंकों के अंतर को तेजी से पाट दिया। इसके बाद ब्लिट्ज मुकाबलों में उन्होंने संयम बनाए रखा और आखिरकार खिताब पर कब्जा जमा लिया।

पहले ब्लिट्ज गेम में प्रज्ञानानंद के पास जीत हासिल करने के मौके थे, लेकिन समय की कमी के बीच उनसे एक बड़ी गलती हो गई। इसके बाद उनकी स्थिति तेजी से कमजोर हुई। हालांकि, करूआना इस मौके का फायदा नहीं उठा सके और मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ।

इस नतीजे के बाद प्रज्ञानानंद ने अपनी बढ़त बनाए रखी और अंततः ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली।

ग्रैंड चेस टूर जीतने वाले पहले भारतीय

Chess.com के मुताबिक, प्रज्ञानानंद की यह जीत भारतीय शतरंज के इतिहास में बेहद खास है। वह ग्रैंड चेस टूर जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं।

कम उम्र में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ अपनी पहचान बनाने वाले प्रज्ञानानंद ने एक बार फिर साबित किया कि भारतीय शतरंज नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। फैबियानो करूआना जैसे अनुभवी खिलाड़ी के खिलाफ छह अंकों से पिछड़ने के बाद खिताब जीतना उनके धैर्य, रणनीति और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता को दर्शाता है।

वेस्ली सो ने जीता तीसरे स्थान का मुकाबला

तीसरे स्थान के मुकाबले में ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो ने भी शानदार वापसी की। उनका सामना जर्मनी के ग्रैंडमास्टर विंसेंट कीमर से था।

दोनों खिलाड़ियों के बीच रैपिड चरण में मुकाबला काफी बराबरी का रहा और दोनों ने एक-एक गेम जीता। लेकिन ब्लिट्ज में वेस्ली सो ने पूरी तरह दबदबा बनाया। उन्होंने चारों ब्लिट्ज गेम जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

सो ने 18-12 के स्कोर से जीत दर्ज की और तीसरा स्थान हासिल किया।

करूआना के खिलाफ पहले मुकाबले में मिली थी बड़ी हार

प्रज्ञानानंद की इस ऐतिहासिक जीत की खास बात यह भी है कि उन्होंने फाइनल में बेहद मुश्किल स्थिति से वापसी की। इससे पहले करूआना के खिलाफ उनका पहला क्लासिकल गेम एकतरफा रहा था और भारतीय ग्रैंडमास्टर को 6-0 से हार का सामना करना पड़ा था।

हालांकि, प्रज्ञानानंद ने अगले क्लासिकल गेम में खुद को संभाला और करूआना के खिलाफ 3-3 से ड्रॉ खेला। इसके बावजूद दूसरे दिन की शुरुआत में करूआना छह अंकों की बढ़त के साथ आगे थे।

लेकिन इसके बाद रैपिड और ब्लिट्ज में प्रज्ञानानंद ने ऐसा खेल दिखाया कि पूरा समीकरण बदल गया। छह अंकों से पिछड़ने के बावजूद उन्होंने फाइनल 15-13 से जीतकर इतिहास रच दिया।

यह खिताब प्रज्ञानानंद के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और भारतीय शतरंज के लिए भी एक ऐतिहासिक पल बन गया है।