आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए शनिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्यापार समझौते पर अमेरिका से दोबारा बातचीत नहीं कर सकते और वह फिर से समर्पण कर देंगे।
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक शुल्क को खारिज कर दिया, जिससे ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को बड़ा झटका लगा है।
न्यायाधीशों ने बहुमत के फैसले में कहा कि संविधान बहुत स्पष्ट रूप से अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को कर लगाने की शक्ति देता है, जिसमें शुल्क भी शामिल है।
पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘प्रधानमंत्री समझौता कर चुके हैं। उनका विश्वासघात अब उजागर हो गया है। वह (व्यापार समझौते पर) दोबारा बातचीत नहीं कर सकते। वह फिर से समर्पण कर देंगे।’’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘बिना सिर-पैर वाली विदेश नीति या एकतरफा समर्पण? जिस ‘‘ट्रैप डील’’ ने भारत से भारी रियायतें लीं, मोदी सरकार ने उसमें फंसने से पहले शुल्क पर अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया?’’
उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त वक्तव्य में भारत को होने वाले कई अमेरिकी निर्यातों पर शून्य शुल्क की बात कही गई है जिससे भारतीय कृषि क्षेत्र का द्वार अमेरिकी वस्तुओं के लिए खुल जाएगा। साथ ही, 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान आयात करने की योजना, हमारी ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता और डिजिटल मोर्चे पर कई कर रियायतों की बात संयुक्त वक्तव्य में कही गई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि भारत के राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करने के लिए उन पर किसने दबाव डाला? क्या यह एप्स्टीन फाइलें थीं?’’