कर्नाटक में ‘वंदे मातरम’ के दो पदों के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 15-09-2026
PIL in Karnataka HC challenges govt order to sing only 2 stanzas of Vande Mataram
PIL in Karnataka HC challenges govt order to sing only 2 stanzas of Vande Mataram

 

बेंगलुरु (कर्नाटक) 

कर्नाटक हाई कोर्ट में राज्य सरकार के 8 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस आदेश में कहा गया है कि राज्य के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पद ही गाए जाएं, सिवाय उन कार्यक्रमों के जिनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल शामिल हों। वकील अंगद कामथ के ज़रिए वकील गिरीश भारद्वाज द्वारा दायर इस याचिका का आज लिस्टिंग के लिए ज़िक्र किए जाने की उम्मीद है। 3 सितंबर को कैबिनेट के फैसले के बाद कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी यह आदेश कथित तौर पर केंद्र सरकार के प्रोटोकॉल के खिलाफ है।
 
याचिकाकर्ता गृह मंत्रालय के 9 जुलाई के उस पत्र का हवाला देते हैं जिसमें सभी मौकों पर राष्ट्रगीत के आधिकारिक छह-पद वाले संस्करण को गाने का निर्देश दिया गया है। PIL में तर्क दिया गया है कि 'राष्ट्रगीत' सातवीं अनुसूची की सूची II या सूची III के अंतर्गत नहीं आता है, और इसलिए यह अनुच्छेद 248 के साथ पढ़ी जाने वाली सूची I की प्रविष्टि 97 के तहत संसद के विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है। इसमें कहा गया है कि जो काम राज्य विधानसभा कानून बनाकर नहीं कर सकती, उसे सरकार अनुच्छेद 162 के तहत कार्यकारी आदेश से नहीं कर सकती।
 
इसमें आगे तर्क दिया गया है कि यह आदेश अनुच्छेद 256, 257(1) और 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026' का उल्लंघन करता है, जो राष्ट्रगीत को सुरक्षा प्रदान करता है। याचिका में प्रक्रियात्मक खामियों का भी आरोप लगाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि कैबिनेट ने बिना किसी कैबिनेट नोट या कानून विभाग की सलाह के 'अनौपचारिक चर्चा' के आधार पर यह फैसला लिया, जिससे 'व्यापार के लेन-देन के नियम, 1977' का उल्लंघन हुआ और अनुच्छेद 19(1)(a) का भी उल्लंघन हुआ। इससे पहले, 10 सितंबर को कर्नाटक सरकार ने एक आदेश जारी कर सभी राज्य सरकार के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले दो पद गाने का निर्देश दिया था।
 
हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सभी छह पद गाए जाएंगे। यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक पत्र के माध्यम से जारी दिशानिर्देशों के आधार पर लिया गया था। आदेश में राज्य सरकार ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में 'वंदे मातरम' ने अहम भूमिका निभाई और नागरिकों में राष्ट्रवाद, एकता और देशभक्ति की भावना जगाने में मदद की।
 
गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का आधिकारिक संस्करण जारी किया है और साथ ही विभिन्न आधिकारिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसे बजाने और गाने के बारे में दिशानिर्देश भी दिए हैं। इन दिशानिर्देशों में गीत को बजाने और सामूहिक रूप से गाने के लिए अलग-अलग नियम बताए गए हैं। कर्नाटक सरकार ने कैबिनेट के फैसले के बाद ये निर्देश जारी किए। इन निर्देशों में सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों में 'वंदे मातरम' गाने और बजाने के दौरान एकरूपता, गरिमा और उचित शिष्टाचार बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया है।
 
इस आदेश की प्रतियां सभी अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, विधानमंडल सचिवालय, कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC), पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (DGP और IGP), सभी मंत्रियों के निजी सचिवों, राज्यपाल के विशेष सचिव, क्षेत्रीय आयुक्तों, उपायुक्तों, ज़िला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, विभागों के प्रमुखों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और अन्य लोगों को भेजी गई हैं।
यह आदेश आधिकारिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। केंद्र सरकार ने अपने कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य कर दिया है।