‘Melodi’ ट्रेंड होते ही रॉकेट बना Parle शेयर, लेकिन असली कहानी कुछ और

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 20-05-2026
Parle Shares Skyrocket as ‘Melodi’ Trends—But the Real Story Is Something Else
Parle Shares Skyrocket as ‘Melodi’ Trends—But the Real Story Is Something Else

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘Melody’ टॉफी गिफ्ट किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर अचानक ‘Melodi’ ट्रेंड करने लगा। इंटरनेट पर इस मुद्दे को लेकर जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई और देखते ही देखते इसका असर शेयर बाजार तक पहुंच गया। ‘Parle’ नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया, क्योंकि Melody टॉफी बनाने वाली कंपनी Parle Products है। इसी नाम की वजह से शेयर बाजार में लिस्टेड Parle Industries Ltd के शेयरों में अचानक खरीदारी बढ़ गई और कंपनी का स्टॉक 5 प्रतिशत के अपर सर्किट के साथ तेजी से ऊपर चढ़ गया।

BSE पर कारोबार के दौरान Parle Industries Ltd का शेयर करीब 5.25 रुपये तक पहुंच गया। निवेशकों के बीच इस शेयर को लेकर अचानक उत्साह देखने को मिला। कई लोगों को लगा कि यह वही कंपनी है जो Parle-G बिस्किट, Melody टॉफी, Monaco, Krackjack, Hide & Seek और Mango Bite जैसे लोकप्रिय प्रोडक्ट बनाती है। लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग निकली। केवल नाम समान होने की वजह से बाजार में भ्रम पैदा हुआ और इसी कारण इस शेयर में तेजी देखने को मिली।

दरअसल, Parle Products और Parle Industries Ltd दो पूरी तरह अलग कंपनियां हैं। Parle Products देश की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय FMCG कंपनियों में से एक है, जो कई दशकों से भारतीय बाजार में बिस्किट और कन्फेक्शनरी प्रोडक्ट बेच रही है। Parle-G भारत के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट ब्रांड्स में शामिल है। इसके अलावा कंपनी Monaco, Krackjack, Hide & Seek, Melody, Mango Bite और कई अन्य मशहूर ब्रांड्स का निर्माण करती है। ग्रामीण इलाकों से लेकर बड़े शहरों तक Parle Products की मजबूत पकड़ मानी जाती है और इसके प्रोडक्ट लगभग हर किराना दुकान पर आसानी से मिल जाते हैं।

हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Parle Products अभी तक भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। कंपनी एक प्राइवेट एंटिटी के रूप में काम कर रही है, इसलिए इसके शेयर NSE या BSE पर ट्रेड नहीं होते। इसका मतलब यह है कि आम निवेशक फिलहाल शेयर बाजार के जरिए Parle-G या Melody बनाने वाली असली कंपनी में सीधे निवेश नहीं कर सकते। यही वजह है कि Parle नाम देखकर Parle Industries Ltd के शेयर खरीदने वाले कई निवेशकों को बाद में वास्तविकता पता चली।

मेलोडी कैंडी को लेकर भी लोगों में खास दिलचस्पी देखने को मिली। मेलोडी चॉकलेट पारले प्रोडक्ट्स की एक बेहद लोकप्रिय कैंडी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी चॉकलेट का एक स्टैंडर्ड पैक गिफ्ट किया। मेलोनी ने इस गिफ्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा, “गिफ्ट के लिए धन्यवाद।” इसके बाद सोशल मीडिया पर ‘Melodi’ शब्द तेजी से वायरल होने लगा।

मेलोडी कैंडी की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा स्वाद और बनावट है। इसका बाहरी हिस्सा सख्त कैरामल का होता है, जबकि अंदर का हिस्सा गाढ़ी चॉकलेट से भरा रहता है। यही वजह है कि यह कैंडी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के बीच लोकप्रिय रही है। मेलोडी को पारले प्रोडक्ट्स का फ्लैगशिप कैंडी ब्रांड माना जाता है। कंपनी की स्थापना साल 1929 में हुई थी, जबकि इस कैंडी को 1983 में लॉन्च किया गया था। लॉन्च के बाद से ही यह भारतीय बाजार में बेहद लोकप्रिय हो गई और आज भी इसका दबदबा कायम है।

कंपनी के कारोबार की बात करें तो पारले प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन लगातार मजबूत बना हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 8.5 प्रतिशत बढ़कर 15,568.49 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी अवधि में कंपनी का प्रॉफिट 979.53 करोड़ रुपये रहा। भारत के कनफेक्शनरी बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत बताई जाती है। वहीं कंपनी की अनुमानित मार्केट वैल्यू 8 से 10 अरब डॉलर के बीच मानी जाती है। हालांकि कंपनी अलग-अलग कैंडी ब्रांड्स की कमाई सार्वजनिक नहीं करती, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक उसकी कनफेक्शनरी डिवीजन की कमाई में मेलोडी का सबसे बड़ा योगदान है।

पारले प्रोडक्ट्स का इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है। कंपनी की स्थापना साल 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान ने मुंबई के विले पार्ले इलाके में की थी। शुरुआत में कंपनी जर्मनी से मंगाई गई मशीनों की मदद से मिठाई और कैंडी बनाती थी। इसके बाद 1939 में कंपनी ने बिस्किट निर्माण के कारोबार में कदम रखा और धीरे-धीरे Parle-G भारतीय घरों की पहचान बन गया। 1983 में कंपनी ने मेलोडी कैंडी लॉन्च की, जो अपने अलग स्वाद की वजह से बहुत कम समय में बाजार में छा गई।

मेलोडी की सफलता में उसके विज्ञापनों का भी बड़ा योगदान माना जाता है। इसकी मशहूर टैगलाइन “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” लोगों की जुबान पर चढ़ गई थी। इसके जवाब में विज्ञापन में कहा जाता था, “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।” यह कैंपेन इतना लोकप्रिय हुआ कि मेलोडी घर-घर तक पहुंच गई और बच्चों के साथ-साथ युवाओं में भी बेहद पसंद की जाने लगी।

समय के साथ पारले ग्रुप तीन हिस्सों में बंट गया, लेकिन मेलोडी ब्रांड फ्लैगशिप कंपनी पारले प्रोडक्ट्स के पास ही रहा। आज बाजार में कई बड़ी और अंतरराष्ट्रीय कैंडी कंपनियां मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद मेलोडी का भारतीय बाजार में अलग स्थान बना हुआ है और इसकी लोकप्रियता अब भी बरकरार है।

Melody khao, khud jaan jao': ₹1 toffee gets a diplomatic moment as PM Modi  gifts it to Meloni - BusinessToday

फिलहाल पारले प्रोडक्ट्स का संचालन विजय चौहान, शरद चौहान और राज चौहान कर रहे हैं। फोर्ब्स के मुताबिक विजय चौहान और उनके परिवार की कुल नेटवर्थ करीब 8.6 अरब डॉलर आंकी गई है। कंपनी आज Parle-G, Krackjack, Monaco और Melody जैसे कई बड़े ब्रांड्स का निर्माण करती है और भारतीय FMCG सेक्टर में इसकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

दूसरी तरफ Parle Industries Ltd का कारोबार पूरी तरह अलग क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह कंपनी रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, वेस्ट मैनेजमेंट और रिसाइक्लिंग जैसे सेक्टर्स में काम करती है। इसका FMCG बिजनेस, बिस्किट निर्माण या कन्फेक्शनरी प्रोडक्ट्स से कोई सीधा संबंध नहीं है। यानी Parle Industries का Parle-G, Melody या किसी भी फूड प्रोडक्ट से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन सोशल मीडिया पर तेजी से फैली चर्चाओं और ‘Parle’ नाम की समानता ने निवेशकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी।

शेयर बाजार में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि किसी बड़े इवेंट, सोशल मीडिया ट्रेंड या चर्चित नाम के कारण समान नाम वाली कंपनियों के शेयरों में अचानक तेजी आ जाती है। कई बार निवेशक बिना पूरी जानकारी के केवल नाम देखकर खरीदारी शुरू कर देते हैं। Parle Industries के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी से जुड़ी खबर वायरल होते ही निवेशकों का ध्यान ‘Parle’ नाम पर गया और इसका असर कंपनी के शेयर पर दिखाई दिया।

हालांकि, बाजार में एक और चर्चा भी काफी समय से चल रही है कि Parle Products भविष्य में अपना IPO ला सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने इस संबंध में कुछ बड़े निवेश बैंकों के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत की है। अगर Parle Products वास्तव में IPO लाती है, तो यह भारतीय FMCG सेक्टर के सबसे बड़े और चर्चित पब्लिक इश्यू में से एक साबित हो सकता है। निवेशकों के बीच इस IPO को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा सकती है, क्योंकि Parle-G जैसे ब्रांड का भारतीय बाजार में बहुत मजबूत नाम है। हालांकि फिलहाल कंपनी की तरफ से IPO को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और अभी यह पूरी तरह निजी कंपनी के रूप में ही काम कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की सही पहचान और उसके कारोबार को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। केवल किसी नाम, सोशल मीडिया ट्रेंड या वायरल खबर के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। खासकर स्मॉल कैप और माइक्रो कैप शेयरों में उतार-चढ़ाव काफी तेज होता है। इनमें अचानक तेजी आने के बाद गिरावट भी उतनी ही तेजी से देखने को मिल सकती है। इसलिए निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स, बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति और वास्तविक गतिविधियों की पूरी जानकारी लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सोशल मीडिया ट्रेंड और चर्चित घटनाएं शेयर बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन समझदारी इसी में है कि निवेशक भावनाओं या नाम की समानता के बजाय तथ्यों और सही जानकारी के आधार पर ही निवेश का फैसला लें।

इसी बीच भारत और इटली के रिश्तों को लेकर भी एक बड़ा कूटनीतिक संदेश सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भारत-इटली संबंधों को नई दिशा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया। दोनों नेताओं ने कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित एक संयुक्त लेख में भारत-इटली रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” बताया और इसे उभरते हुए “इंडो-मेडिटेरेनियन” दौर का अहम आधार कहा।

“India and Italy: A Strategic Partnership for the Indo-Mediterranean” शीर्षक वाले इस संयुक्त लेख में दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और इटली के संबंध अब निर्णायक चरण में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता केवल दोस्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य के साझा विजन पर आधारित साझेदारी बन चुका है।

लेख में भारत-इटली संबंधों को एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का हिस्सा बताया गया है, जो इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन क्षेत्र को जोड़ते हुए “इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर” के रूप में उभर रहा है। इसे व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, डेटा और रणनीतिक कनेक्टिविटी का नया नेटवर्क बताया गया।

दोनों नेताओं ने तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच राजनीतिक समन्वय, आर्थिक एकीकरण और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि देश नवाचार, ऊर्जा परिवर्तन और रणनीतिक संप्रभुता को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाते हैं।