पणजी/नई दिल्ली
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आगामी तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र से पहले सांसदों को कड़ी चेतावनी देते हुए सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संसद परिसर में पोस्टर, तख्तियां, नारेबाजी और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और इसे हर हाल में रोका जाएगा।
ओम बिरला ने कहा कि इस संबंध में सभी सांसदों, राजनीतिक दलों और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के साथ चर्चा की गई है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर आधिकारिक बुलेटिन भी जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि संसद के भीतर और परिसर में व्यवहार संयमित और गरिमापूर्ण होना चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हर सांसद को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन उसे संसदीय मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही व्यक्त करना चाहिए। बिरला के अनुसार, हाल के समय में विरोध प्रदर्शन के तौर-तरीकों में बदलाव आया है, जिससे संसद की पवित्रता प्रभावित हो रही है।
यह विशेष सत्र 16, 17 और 18 तारीख को आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण कानून यानी ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े अहम संशोधनों पर चर्चा होगी। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की योजना है, जिसे 2029 के चुनावों में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज महिलाएं समाज, विज्ञान, तकनीक और सेना सहित हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में शासन और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाना समय की मांग है।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महिला आरक्षण को लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाला कदम बताते हुए कहा कि इसमें देरी करना दुर्भाग्यपूर्ण होगा। उन्होंने इस विषय पर अपने विचार साझा करते हुए इसे देश के भविष्य के लिए जरूरी बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि संसद के इस अहम सत्र में अनुशासन और गरिमा बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि महिला सशक्तिकरण से जुड़े इस ऐतिहासिक विधेयक पर सार्थक चर्चा हो सके और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिले।