बिहू पर मुसफिका हुसैन की रिबन कढ़ाई में खिला कोपौ ऑर्किड

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 11-04-2026
Mushfika Hussain's ribbon embroidery on Bihu features blooming kopao orchids
Mushfika Hussain's ribbon embroidery on Bihu features blooming kopao orchids

 

मुन्नी बेगम / गुवाहाटी

त्योहारों का समय अब सिर्फ उपहार देने का नहीं रहा। लोगों की पसंद भी बदल रही है। अब लोग साधारण गिफ्ट की जगह हाथ से बने खास तोहफे देना पसंद करते हैं। इन दिनों बोहाग बिहू का समय है। असम की परंपरा से जुड़े डिज़ाइनों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

इसी को समझते हुए मछखोवा की रहने वाली मुसफिका हुसैन ने अपनी कला को एक मौका बना लिया। उन्होंने फॉक्सटेल यानी कोपौ ऑर्किड के खूबसूरत डिज़ाइन से रिबन कढ़ाई के प्रोडक्ट बनाकर खास पहचान बनाई है। यह फूल बिहू से गहराई से जुड़ा है। इसलिए उनके बनाए सामान और भी खास लगते हैं।

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मुसफिका एक रिटायर्ड टीचर हैं। नौकरी के समय से ही उन्हें कढ़ाई का शौक था। घर और काम के बीच जब भी समय मिलता, वह कढ़ाई करती थीं। यह उनके लिए सुकून का जरिया था। अब यही शौक उनकी कमाई बन गया है।

उन्होंने यूट्यूब देखकर रिबन कढ़ाई और सिरेमिक सजावटी चीजें बनाना सीखा। अब वह इन्हीं में अपनी रचनात्मकता दिखा रही हैं।मुसफिका कहती हैं, बचपन से ही मुझे हस्तकला पसंद थी। नौकरी के साथ मैं घर पर छोटे काम करती थी। एक बार प्रदर्शनी में रिबन कढ़ाई देखी तो दिल लग गया। तब से यह काम शुरू किया।

इस बार बिहू के लिए उन्होंने कोपौ ऑर्किड के डिज़ाइन बनाए। ग्राहकों को यह बहुत पसंद आया। यह असम की पहचान है, इसलिए लोग इसे खास गिफ्ट मानते हैं। रिबन कढ़ाई और साधारण कढ़ाई में बहुत फर्क नहीं है। लेकिन रिबन कढ़ाई 3D होती है। इसमें ज्यादा समय और मेहनत लगती है। सिर्फ देखकर कोई इसे कॉपी नहीं कर सकता। इसमें हुनर और नई सोच जरूरी है।

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मुसफिका बताती हैं, मैंने कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली। यूट्यूब से सीखा। आसान डिज़ाइनों से शुरुआत की। मैं खुद के डिज़ाइन बनाती हूं। मैं सिर्फ तकनीक सीखती हूं, नकल नहीं करती। वह अच्छे कपड़े का इस्तेमाल करती हैं और काम को साफ और सुंदर बनाने पर ध्यान देती हैं। वह हर त्योहार के हिसाब से नए डिज़ाइन बनाने की कोशिश करती हैं। अब वह मेखेला सादोर में भी रिबन कढ़ाई लाने की सोच रही हैं।

उन्होंने कई तरह के प्रोडक्ट बनाए हैं। जैसे रनर, टेबल क्लॉथ, बैग, कुशन कवर, सोफा कवर, डाइनिंग मैट और फोटो फ्रेम। वह मोमबत्ती बनाने का काम भी सीख चुकी हैं। वह कहती हैं, रिबन कढ़ाई पूरी तरह हाथ से होती है। मैं ज्यादा तर फूल, पौधे और पक्षियों के डिज़ाइन बनाती हूं।

हाल ही में उन्होंने मालिगांव के बोहागी मेले में हिस्सा लिया। वहां उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिर भी वह मानती हैं कि असम में हाथ से बने सामान का बाजार अभी छोटा है। लोग कीमत देखकर हिचकते हैं। उन्हें लगता है कि यह महंगा है। लेकिन इसके पीछे बहुत मेहनत होती है। इसलिए हर कोई इसे खरीद नहीं पाता।

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उनके प्रोडक्ट की कीमत कुछ इस तरह है। मोबाइल बैग 350 रुपये। टेबल क्लॉथ 800 से 900 रुपये। कुशन कवर 400 से 450 रुपये। तीन पीस सेट 700 से 800 रुपये। रनर 650 रुपये। डाइनिंग मैट 1600 रुपये तक। सोफा कवर भी 1600 रुपये तक।

उनका काम प्रदर्शनी, दोस्तों और सोशल मीडिया से फैल रहा है। उनके फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज से भी ऑर्डर आते हैं। उनके प्रोडक्ट सिलपुखुरी के एक स्टोर में भी मिलते हैं। मुसफिका कहती हैं, अगर किसी के पास हुनर है तो वह कमाई का जरिया बन सकता है। घर बैठकर भी काम किया जा सकता है।

वह खासकर महिलाओं से कहती हैं, बहुत सी महिलाएं हुनरमंद होती हैं लेकिन खुद को सिर्फ घर तक सीमित रखती हैं। अगर इच्छा हो तो घर से काम करके भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है। मुसफिका को बागवानी और खाना बनाना भी पसंद है। उन्होंने बहुत कम पैसे से काम शुरू किया था। आज वह साल में 1 से 2 लाख रुपये तक कमा रही हैं।

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वह कहती हैं, मेहनत जरूरी है। रिबन कढ़ाई या कोई भी कला आपको आत्मनिर्भर बना सकती है। विदेशों में इसकी मांग ज्यादा है। 2022 में उन्होंने 12 महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी थी। आगे भी वह लोगों को सिखाना चाहती हैं।