भक्ति के बीच भाईचारे की चमक, मुस्लिम समाज ने बढ़ाया मदद का हाथ

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 11-04-2026
The Radiance of Brotherhood Amidst Devotion: The Muslim Community Extends a Helping Hand
The Radiance of Brotherhood Amidst Devotion: The Muslim Community Extends a Helping Hand

 

भक्ति चालक

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के आर्णी शहर में पंडित प्रदीपजी मिश्रा की शिवमहापुराण कथा के लिए लोगों का एक बड़ा सैलाब उमड़ पड़ा था। कथा की वजह से शहर में भक्ति का माहौल था, लेकिन तभी बढ़ती गर्मी और अचानक आई बेमौसम बारिश ने श्रद्धालुओं के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी।

ऐसे वक्त में स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ आर्णी के सभी धर्मों के लोग, खासकर मुस्लिम, इन श्रद्धालुओं की मदद के लिए दौड़ पड़े। मुस्लिमों की इस सेवा ने समाज के सामने आपसी भाईचारे की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।

चिलचिलाती धूप में दूर-दूर से आए लाखों श्रद्धालुओं की प्यास बुझाने के लिए यहां के मुस्लिम नौजवानों ने पहल की। कथा के लिए आने वाले रास्ते और कथा स्थल पर ये नौजवान ठंडा पानी और शरबत लेकर खड़े थे।

यासीन लाला ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में सेवा के इस काम का ज़िक्र किया है। उन्होंने लिखा है, "कथा के पूरे 8 दिन लाला कंपनी की तरफ से श्रद्धालुओं के लिए पानी और शरबत मौजूद रहेगा। हमें इस बात पर फख्र है कि हम इस शिवमहापुराण कथा में शामिल हुए हैं। मदद के लिए आगे आए हाथ दुआ करने वाले हाथों से भी ज़्यादा पाक होते हैं।"

सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के नाश्ते का इंतज़ाम करने के लिए भी कई हाथ आगे आए। मुबारक नगर के रहने वाले शरीफ भाई ने अपने खर्चे पर घर से पोहा बनाकर श्रद्धालुओं को नाश्ता बांटा। फैयाज़ सैयद ने इस पहल का वीडियो अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया। उस वीडियो में शरीफ भाई का निस्वार्थ सेवा भाव साफ तौर पर नज़र आ रहा है।

सिर्फ कथा के लिए आए श्रद्धालुओं को ही नहीं, बल्कि वहां अपनी ड्यूटी निभा रहे पुलिस वालों को भी सेवा दी गई है। आरु खान ने भी एक वीडियो पोस्ट किया है। उसमें वह कथा स्थल पर बंदोबस्त में लगे पुलिस वालों को पानी बांटते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सेवा के इन सभी कामों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत बुधवार रात को महसूस हुई। दिन भर की उमस के बाद रात करीब 11:30 बजे अचानक तेज़ आंधी और बारिश आ गई। सिद्धेश्वर नगरी में मौजूद कथा स्थल पर 20 हज़ार से ज़्यादा श्रद्धालु ठहरे हुए थे। अचानक आई इस मुसीबत से श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई। ऐसे वक्त में आर्णी के लोगों ने रातों-रात राहत और बचाव का काम किया।

स्थानीय मुस्लिम और दूसरे धर्मों के लोगों ने एंबुलेंस, ऑटो-रिक्शा और ट्रैक्टर की मदद से बारिश में फंसे श्रद्धालुओं को महफूज़ जगहों पर पहुँचाया। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बाबा कंबलपोश दरगाह, माहेर मंगल कार्यालय और महालक्ष्मी मंगल कार्यालय जैसी जगहों को फौरन खोल दिया गया।

मुसीबत के वक्त जात-पात या धर्म न देखते हुए सिर्फ इंसानियत के नाते आर्णी के लोगों ने जो काम किया है, वह वाकई काबिले तारीफ है। कथा के मौके पर होने वाला यह अन्नदान और सेवा का काम सिर्फ एक धर्म तक सीमित न रहकर, आर्णी में सही मायनों में एक सार्वजनिक त्योहार का रूप लेता हुआ दिखाई दिया।