जामिया हमदर्द में ‘कल्चरल कारवां’ का यादगार समापन,आवाज द वाॅयस बना मीडिया पार्टनर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 11-04-2026
Memorable Conclusion of ‘Cultural Caravan’ at Jamia Hamdard: University Campus Comes Alive with the Talent and Spirit of Youth
Memorable Conclusion of ‘Cultural Caravan’ at Jamia Hamdard: University Campus Comes Alive with the Talent and Spirit of Youth

 

इकबाल, नई दिल्ली

राजधानी के जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय में पिछले तीन दिनों से जारी खुशियों का कारवां शुक्रवार को अपनी मंजिल पर पहुंच गया। ‘कल्चरल कारवां-2026’ का समापन किसी उत्सव से कम नहीं था। परिसर में सुबह से ही एक अलग तरह की हलचल थी। क्या छात्र और क्या शिक्षक, हर कोई इस खास पल का गवाह बनने के लिए उत्साहित नजर आया। तीन दिनों तक चली सांस्कृतिक और साहित्यिक दौड़-धूप के बाद आज बारी थी उन चेहरों को सम्मानित करने की जिन्होंने अपनी प्रतिभा से सबका दिल जीत लिया।इस आयोजन को सफल बनाने में आवाज द वाॅयस ने मीडिया पार्टनर की हैसियत से अहम भूमिका निभाई.

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कार्यक्रम की शुरुआत रूहानियत के साथ हुई। गुलाम यज़दानी ने जब मंच से नात शरीफ पेश की तो पूरा हॉल एक अलग ही सुकून में डूब गया। उनकी आवाज में वो कशिश थी जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। इसके फौरन बाद बिलाल ने अपनी सोलो सिंगिंग से माहौल को ऊर्जा से भर दिया। बिलाल की गायकी पर छात्र अपनी सीटों से खड़े होकर तालियां बजाने को मजबूर हो गए।

मंच का मोर्चा हानिया वाजिद और फ़ैज़ अहमद ने संभाल रखा था। दोनों की जुगलबंदी ने पूरे कार्यक्रम में जान फूंक दी। उनकी कॉमिक टाइमिंग और बात करने के अंदाज ने दर्शकों को एक पल के लिए भी बोर नहीं होने दिया।

इस मौके पर दूरदर्शन के डायरेक्टर जनरल के. एस. नंबूदरीपाद मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने बहुत सादगी के साथ छात्रों से बात की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवाओं के पास मौकों की कमी नहीं है। बस जरूरत है अपनी ताकत को पहचानने की। उन्होंने छात्रों को मेहनत का मंत्र दिया और कहा कि भविष्य उन्हीं का है जो आज पसीना बहाने को तैयार हैं।

विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) एम. अफशर आलम ने भी छात्रों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सिर्फ किताबी कीड़ा बनकर आप दुनिया नहीं जीत सकते। व्यक्तित्व को निखारने के लिए खेल, संगीत और साहित्य से जुड़ना बहुत जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे आयोजन सिर्फ मनोरंजन नहीं हैं बल्कि ये छात्रों के अंदर का डर खत्म कर उन्हें आत्मविश्वास से भर देते हैं।

इसके बाद उस घड़ी का आगाज हुआ जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था। पुरस्कार वितरण समारोह शुरू हुआ। एक-एक कर जब विजेताओं के नाम पुकारे गए तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। साहित्यिक स्पर्धाओं में फार्मेसी विभाग (SPER) का दबदबा साफ नजर आया। सामान्य ज्ञान क्विज में सारा तबस्सुम और मननत हुंडाल की जोड़ी ने बाजी मारी। वहीं बैतबाज़ी जैसे पारंपरिक और कठिन मुकाबले में 'टीम ग़ालिब' ने अपनी धाक जमाई। उर्दू अदब और शेरो-शायरी के इस मुकाबले ने पुरानी यादें ताजा कर दीं।

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निबंध लेखन में लैबा सिद्दीकी पहले स्थान पर रहीं। वहीं अपनी बात को तर्क के साथ रखने के हुनर 'पॉइंट काउंटर पॉइंट' में अनूशेह नाज़िर ने सबको प्रभावित किया। कविता और कहानी लेखन में भी छात्रों ने अपनी कलम का जादू दिखाया। शमशाद अहमद की खुद की लिखी कविता को जूरी ने खूब सराहा। इस्लामिक क्विज में मोहम्मद असदुल्लाह अबशर और उनकी टीम ने अव्वल मुकाम हासिल किया। नात प्रतियोगिता में गुलाम ने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा।

सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि योगा, डांस, कव्वाली और खेलकूद की स्पर्धाओं में भी विजेताओं को वीसी के हाथों इनाम मिले। जब विजेता छात्र मंच पर ट्रॉफी लेने पहुंच रहे थे तो उनकी खुशी और गर्व देखने लायक था। कई छात्रों के लिए यह सिर्फ एक मेडल नहीं बल्कि उनकी कड़ी मेहनत का प्रमाण था।

कार्यक्रम के अंतिम पलों में माहौल थोड़ा भावुक भी हुआ। तीन दिनों की यह दोस्ती और मस्ती अब यादों में तब्दील होने वाली थी। शिक्षकों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से विश्वविद्यालय की रौनक बढ़ जाती है। छात्रों के बीच का आपसी भाईचारा और टीम वर्क इन तीन दिनों में खुलकर सामने आया। अंत में आयोजकों ने सभी का शुक्रिया अदा किया। कल्चरल कारवां का यह सफर भले ही आज खत्म हो गया लेकिन इसकी गूंज आने वाले कई दिनों तक जामिया हमदर्द के गलियारों में सुनाई देती रहेगी।

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साहित्यिक सितारों की फेहरिस्त

1. सामान्य ज्ञान क्विज (General Quiz) फार्मेसी विभाग की सारा तबस्सुम और मननत हुंडाल की जोड़ी पहले नंबर पर रही। मैनेजमेंट विभाग के मोहम्मद जुलकरनैन खान और माहिक रईस ने दूसरा स्थान पाया। तीसरे नंबर पर फिर से फार्मेसी के पुष्कर आनंद और रुद्र साहा ने बाजी मारी।

2. बैतबाज़ी (Bait Bazi) उर्दू शायरी के इस मुकाबले में टीम ग़ालिब (फैज़ अहमद, तनवीर इस्लाम, नाबिल) ने बाजी मारी। टीम इक़बाल (मोहम्मद शमशाद, मोहम्मद रहमतुल्लाह, एजाज़ अहमद) दूसरे और टीम मीर तकी मीर (शालिक अंसारी, कैफ अहमद, अरीब) तीसरे स्थान पर रही।

3. निबंध लेखन (Essay Writing) फार्मेसी की लैबा सिद्दीकी पहले स्थान पर रहीं। लॉ विभाग के श्वेत दूसरे और फार्मेसी की सारा सिद्दीकी तीसरे नंबर पर रहीं।

4. पॉइंट काउंटर पॉइंट (Point Counter Point) मैनेजमेंट विभाग की अनूशेह नाज़िर पहले स्थान पर रहीं। साकिब खान दूसरे और मोहम्मद ज़ैद तीसरे पायदान पर रहे।

5. स्व-रचित कविता (Self Composed Poetry) इस्लामिक स्टडीज़ के शमशाद अहमद ने अपनी कविता से सबको पीछे छोड़ दिया। अरीबा दूसरे और अफ़्फान राशिद तीसरे स्थान पर रहे।

6. एक्सटेम्पोर (Extempore) रत्नेश यादव ने तात्कालिक भाषण में बाजी मारी। तहरीर तनवीर दूसरे और इशान अली तीसरे स्थान पर रहे।

7. इस्लामिक क्विज (Islamic Quiz) मैनेजमेंट विभाग के मोहम्मद असदुल्लाह अबशर, साकिब खान और मोहम्मद अरसलान की टीम पहले नंबर पर रही। शमशाद अहमद और उनकी टीम ने दूसरा स्थान पाया।

8. कहानी लेखन (Story Writing) लॉ विभाग के श्वेत ने कहानी लेखन में पहला इनाम जीता। फोजिया दूसरे और मरियम फिरासत तीसरे स्थान पर रहीं।

9. नात (Naat) इस्लामिक स्टडीज़ के गुलाम पहले नंबर पर रहे। अफ़्फान राशिद ने दूसरा और मुज़फ्फरपुर निशात ने तीसरा स्थान हासिल किया।