आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका तथा ईरान में वार्ता की संभावनाओं के बीच आपूर्ति की दिक्कतें कम होने की उम्मीद तथा सुबह के कारोबार में बड़ी तेल मिलों द्वारा सरसों का दाम तोड़े जाने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को अधिकांश तेल-तिलहनों के दाम में गिरावट देखी गई। सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के भाव स्थिर रहे।
मलेशिया एक्सचेंज में 3.30 बजे एक प्रतिशत की गिरावट थी और फिलहाल यहां मामूली सुधार है। दूसरी ओर शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात सुधार था और फिलहाल भी यहां सुधार है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि किसान किसी भी हालत में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर सरसों बेचने को राजी नहीं हैं जबकि बड़ी मिलें एमएसपी से नीचे दाम पर सरसों खरीदने की इच्छुक हैं। सुबह के कारोबार में इन बड़ी मिलों ने सरसों के दाम 150 रुपये क्विंटल घटाये और फिर भी किसानों से माल नहीं मिलने पर शाम को फिर से सरसों के दाम 50 रुपये क्विंटल बढ़ा दिये। सुबह दाम तोड़े जाने के कारण सरसों तेल-तिलहन में गिरावट दर्ज हुई।
उन्होंने कहा कि 31 मार्च को लेखा खाता बंद होने का समय नजदीक होने के कारण भी कारोबार कुछ सुस्त है जो गिरावट का एक और कारण है। हालांकि, 3-4 दिन में सरकार की सरसों खरीद चालू होने की उम्मीद की जा रही है।
सूत्रों ने कहा कि बाजार में पामोलीन तेल आयात की लागत से 3-4 रुपये किलो नीचे बिक रहा है जबकि सोयाबीन डीगम तेल प्रीमियम पर बिक रहा है। इसके आयात की कमी की स्थिति बने रहने की उम्मीद है। पहले डीगम तेल 6-7 रुपये किलो के प्रीमियम पर बिक रहा था और अब वह 3-4 रुपये किलो के प्रीमियम पर बिक रहा है। इस वजह से सोयाबीन तेल-तिलहन में गिरावट का आभास हो रहा है।