Officials with doubtful Integrity to be removed from key posts: Himachal Chief Minister Sukhu
शिमला (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को ज़ोर देकर कहा कि जिन अधिकारियों की ईमानदारी पर शक होगा, उन्हें अहम सरकारी पदों से हटा दिया जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उनकी सरकार सिर्फ़ भरोसा दिलाने के बजाय सीधे कार्रवाई करेगी। प्रश्नकाल के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सतपाल सत्ती द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है जिन्हें "संदिग्ध ईमानदारी वाले अधिकारियों" (ODI) की श्रेणी में रखा गया है।
सुक्खू ने कहा, "मैं सदन में सिर्फ़ भरोसा नहीं दिलाऊँगा। जो अधिकारी भ्रष्टाचार में शामिल पाए जा रहे हैं, उन्हें सीधे हटाया जा रहा है।" उन्होंने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सरकार के 'ज़ीरो-टॉलरेंस' (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने) वाले रवैये पर ज़ोर दिया। उसी दिन, मुख्यमंत्री विधानसभा के दोबारा शुरू हुए बजट सत्र के पहले दिन पहुँचे, जहाँ उनका ज़ोरदार स्वागत किया गया। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया और विधायक मलेंद्र राजन ने गुलदस्ते देकर उनका स्वागत किया। उनके पहुँचने पर उन्हें औपचारिक 'गार्ड ऑफ़ ऑनर' भी दिया गया।
मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियाँ विधानसभा में चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच आई हैं, जिसमें शासन और जवाबदेही का मुद्दा बजट सत्र के दौरान चर्चा का मुख्य केंद्र बने रहने की उम्मीद है। इससे पहले मंगलवार को हिमाचल विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण 18 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान 13 बैठकें होनी तय हैं और सदन में चर्चा के लिए कुल 834 सवाल सूचीबद्ध किए गए हैं।
मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए पठानिया ने कहा कि मुख्यमंत्री 21 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना चौथा बजट पेश करेंगे। सत्र की शुरुआत 18 से 20 मार्च तक राज्यपाल के अभिभाषण पर 'धन्यवाद प्रस्ताव' के साथ होगी, जिसके बाद 20 मार्च को मुख्यमंत्री अपना जवाब देंगे। बजट अनुमानों पर चर्चा 23 से 25 मार्च तक होगी, जबकि अनुदान मांगों और कटौती प्रस्तावों पर विचार-विमर्श 27 से 30 मार्च तक निर्धारित है। बजट के 30 मार्च को पारित होने की उम्मीद है। अध्यक्ष ने हमें बताया कि सत्र के दौरान कुल 834 प्रश्न उठाए जाएंगे, जिनमें 665 तारांकित और 169 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, विभिन्न नियमों के तहत उठाए गए मुद्दों—नियम 62 के तहत 8, नियम 102 के तहत 3, और नियम 130 के तहत 5—पर भी सदन में चर्चा की जाएगी।