आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अनिवासी भारतीय (एनआरआई) मौजूदा एफसीएनआर पहल के तहत भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं। इसके तहत बैंक सीमित अवधि के लिए एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं। सिंगापुर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने शुक्रवार को यह बात कही।
भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) की सिंगापुर शाखा द्वारा बुधवार को आईसीएआई की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति और उसकी 25 विदेशी शाखाओं के सहयोग से आयोजित वैश्विक वेबिनार में भी इस पर चर्चा की गई।
विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) योजना के तहत एनआरआई और भारतीय मूल के व्यक्ति (पीआईओ) भारतीय बैंकों में प्रमुख विदेशी मुद्राओं में अपनी विदेश में अर्जित आय को सुरक्षित रूप से जमा कर उस पर प्रतिफल प्राप्त कर सकते हैं। यह पारंपरिक सावधि जमा की तरह काम करता है, लेकिन इसमें राशि भारतीय रुपये में परिवर्तित होने के बजाय विदेशी मुद्रा में ही रहती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने और रुपये को समर्थन देने की रणनीति के तहत सीमित अवधि के लिए बैंकों को एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की अनुमति दी है।
आईसीएआई की सिंगापुर शाखा के चेयरमैन संजय गट्टानी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘30 सितंबर, 2026 तक खुली इस एफसीएनआर पहल के तहत अब तक 10 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं।’’
वेबिनार में विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त विचारों से सहमति जताते हुए गट्टानी ने कहा कि इस पहल के तहत एनआरआई भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं।