आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास कार्य को लेकर चल रहे विवाद के बीच, जिला अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने शुक्रवार को कहा कि चल रहे पुनर्निर्माण के दौरान मूर्तियों और कलाकृतियों को कथित नुकसान के बारे में सोशल मीडिया पर गुमराहपूर्ण और निराधार दावे फैलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे दावों का ज़मीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
जिलाधिकारी ने कहा कि पुनर्विकास योजना के तहत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान, घाट पर दीवारों में लगी कुछ कलाकृतियां प्रभावित जरूर हुई हैं।
उन्होंने कहा कि लेकिन ऐसी सभी कलाकृतियों और मूर्तियों को संस्कृति विभाग द्वारा विधिवत संरक्षित किया गया है तथा एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया है एवं काम पूरा होने के बाद उन्हें उनके मूल रूप में फिर से स्थापित किया जाएगा।
कुमार ने जनता से अफवाहों या गलत सूचनाओं पर ध्यान न देने और सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर प्राचीन काल से ही अंतिम संस्कार के लिए बड़ी संख्या में लोग आते रहे हैं, आज भी, दाह संस्कार के लिए भारी भीड़ आती है, जिससे सीमित जगह के कारण अक्सर कतारें लग जाती हैं।
उन्होंने कहा कि पर्याप्त जगह की कमी से स्वच्छता भी प्रभावित होती है, राख आस-पास के घरों तक पहुंच जाती है।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग मुंडन संस्कार के लिए भी घाट पर आते हैं और उन्हें काफी असुविधा होती है।
कुमार ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्थित आवाजाही को ध्यान में रखते हुए, घाट का पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्य वर्तमान में चल रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके तहत, पुराने सीढ़ियों और घाट के कच्चे हिस्सों पर सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जबकि वहां स्थित सभी मंदिरों को पूरी तरह से संरक्षित किया जाएगा।