यमुना में गिरने वाले नालों के उपचार के लिए एनएमसीजी की दो पायलट परियोजनाएं शुरू

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-07-2026
NMCG launches two pilot projects for treatment of drains flowing into Yamuna
NMCG launches two pilot projects for treatment of drains flowing into Yamuna

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने नदी के पुनरुद्धार के लिए प्रकृति-आधारित समाधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यमुना में गिरने वाले नालों के स्थानीय स्तर पर उपचार के लिए निर्मित आर्द्रभूमि आधारित दो पायलट परियोजनाएं शुरू की हैं।
 
एनएमसीजी ने एक बयान में कहा कि शास्त्री पार्क नाले और कैलाश नगर नाले में शुरू की गई दो पायलट परियोजनाएं शहरी नालों के प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक, कम ऊर्जा खपत वाले और जलवायु-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन दोनों परियोजनाओं की संयुक्त उपचार क्षमता लगभग 10 एमएलडी है और दोनों यमुना में जल का निकास करती हैं।
 
यांत्रिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा-गहन प्रक्रियाओं पर बहुत अधिक निर्भर पारंपरिक उपचार प्रणालियों के विपरीत ये परियोजनाएं निर्मित आर्द्रभूमि प्रणालियों पर आधारित हैं, जो प्राकृतिक आर्द्रभूमि के उपचार कार्यों को अपनाती हैं।
 
इन उपचार प्रणालियों में जल प्रवाह को नियंत्रित करने और जल प्रतिधारण समय को बढ़ाने के लिए पत्थर की चिनाई वाली संरचनाओं, घुले हुए ठोस पदार्थों को हटाने के लिए चट्टानी फिल्टर, पोषक तत्वों के अवशोषण और ऑक्सीजन स्थानांतरण के लिए जलीय वनस्पतियों का इस्तेमाल हुआ है।
 
इसके साथ ही, अतिरिक्त पोषक तत्वों और कुछ भारी धातुओं सहित प्रदूषकों को अवशोषित, स्थिर और विघटित करने में सक्षम चयनित पौधों की प्रजातियों का इस्तेमाल करके फाइटोरेमेडिएशन का संयोजन किया गया है।
 
एनएमसीजी ने कहा कि दोनों परियोजना स्थलों पर पहले ही प्रगति हो चुकी है। कैलाश नगर नाले में गाद और कीचड़ हटाने का काम पूरा हो चुका है, ईंटों की परत बिछाने का काम चल रहा है और अगले चरण में पत्थर के फिल्टर लगाए जाएंगे।
 
शास्त्री पार्क नाले में प्रारंभिक गाद और कीचड़ हटाने का काम जारी है, जिससे पत्थर की चिनाई वाली संरचनाएं, पत्थर निस्पंदन प्रणाली और जलीय पौधों की प्रजातियां लगाने का मार्ग प्रशस्त होगा।