नई दिल्ली।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और प्रमुख सचिव (गृह) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों अधिकारियों से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह कार्रवाई डॉ. अंबेडकर जन कल्याण समिति की ओर से दायर शिकायत पर की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेरठ में एक हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर लोग शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान स्थानीय पुलिस ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया, जिससे कई लोगों को गंभीर चोटें आईं।
आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ अनावश्यक बल प्रयोग किया गया है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला हो सकता है। इसी को देखते हुए एनएचआरसी ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और प्रमुख सचिव (गृह) से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने अपने नोटिस में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी देने को कहा है। इसमें यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में पुलिस ने बल प्रयोग का निर्णय लिया, प्रदर्शनकारियों को कितनी और किस प्रकार की चोटें आईं, पुलिस कार्रवाई का कानूनी आधार क्या था तथा घायल लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई या नहीं।
इसके अलावा एनएचआरसी ने यह भी पूछा है कि यदि जांच में पुलिस की ओर से किसी प्रकार की ज्यादती या अधिकारों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने और कार्रवाई करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
मानवाधिकार आयोग की इस कार्रवाई को मेरठ लाठीचार्ज मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग को आयोग के समक्ष पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसके आधार पर एनएचआरसी आगे की कार्रवाई तय करेगा।