नए UPI नियम: ₹2,000 से ऊपर पेमेंट, MDR और मंथली लिमिट की पूरी जानकारी

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 16-09-2026
New UPI Rules: Full details on payments above ₹2,000, MDR, and monthly limits.
New UPI Rules: Full details on payments above ₹2,000, MDR, and monthly limits.

 

आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली  

UPI को लेकर नए नियमों के बाद लोगों के बीच यह भ्रम पैदा हुआ है कि क्या अब UPI से पैसे भेजने पर चार्ज देना होगा या हर महीने ट्रांजैक्शन की कोई सीमा तय कर दी गई है। सरकार ने इन दोनों सवालों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि आम लोगों के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह फ्री रहेगा। किसी दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजने पर कोई ट्रांजैक्शन फीस या प्लेटफॉर्म चार्ज नहीं लगेगा। यह नियम ट्रांजैक्शन की रकम पर निर्भर नहीं करेगा। यानी ₹500 से लेकर ₹50,000 तक किसी व्यक्ति को भेजा गया पैसा फ्री रहेगा। इसी तरह UPI के जरिए पैसे प्राप्त करने पर भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

नए बदलाव मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदारों और कारोबारियों को किए जाने वाले कुछ बड़े भुगतान से जुड़े हैं। नए फ्रेमवर्क के तहत निर्धारित मर्चेंट ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होगा। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क ग्राहक को नहीं देना होगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक किसी दुकान पर ₹10,000 का UPI पेमेंट करता है तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से MDR ₹40 हो सकता है, लेकिन ग्राहक से ₹40 अतिरिक्त नहीं लिए जाएंगे। सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहकों पर न डालें।
 
₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट पहले की तरह फ्री रहेंगे। अगर ग्राहक किसी दुकान का QR कोड स्कैन करके ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 का भुगतान करता है, तो उस पर MDR नहीं लगेगा। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन नए MDR फ्रेमवर्क से प्रभावित नहीं होंगे। इनमें ₹2,000 तक के भुगतान और Zero-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के ट्रांजैक्शन शामिल हैं।
 
छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स को भी राहत दी गई है। P2PM कैटेगरी के तहत UPI QR कोड से हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को Zero MDR का लाभ मिलता रहेगा। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की अतिरिक्त लागत का बोझ न पड़ने देना है।
 
कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टरों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के निर्धारित ट्रांजैक्शन पर ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR लागू होगा। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर्स से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
 
UPI की कथित मंथली लिमिट को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत यूजर्स के लिए कोई मासिक कोटा या फ्री ट्रांजैक्शन की संख्या तय नहीं की गई है। इसका मतलब है कि महीने में कितनी बार UPI का इस्तेमाल किया गया, इसके आधार पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। हालांकि, बैंक और NPCI सुरक्षा तथा जोखिम प्रबंधन के लिए अलग-अलग तरह के ट्रांजैक्शन पर दैनिक सीमा निर्धारित कर सकते हैं। ये सीमाएं ट्रांजैक्शन के प्रकार के अनुसार आम तौर पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती हैं। दैनिक सीमा पूरी होने का मतलब यह नहीं है कि अगला पेमेंट करने के लिए शुल्क देना होगा; इसका अर्थ केवल यह है कि सीमा रीसेट होने तक नया ट्रांजैक्शन नहीं किया जा सकेगा।
 
सरकार के अनुसार UPI के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 70 प्रतिशत P2P यानी Person-to-Person भुगतान से आता है और ये नए MDR फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर रहेंगे। इसलिए आम यूजर के लिए किसी व्यक्ति को पैसा भेजने या प्राप्त करने की व्यवस्था में कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।
 
नए फ्रेमवर्क का उद्देश्य UPI पेमेंट सिस्टम के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी जरूरतों और सुरक्षा व्यवस्था को सपोर्ट करना बताया गया है। सरकार के मुताबिक MDR से जुड़े प्रावधान पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच लागू होंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि MDR और ग्राहक से वसूले जाने वाले चार्ज को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।
 
कुल मिलाकर, आम UPI यूजर के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी दोस्त या परिवार को पैसे भेजना फ्री रहेगा, UPI से पैसे प्राप्त करने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट फ्री रहेंगे और व्यक्तिगत यूजर्स के लिए कोई मासिक UPI कोटा नहीं बनाया गया है। ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने के बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क ग्राहक से नहीं लिया जाना है। यानी नए नियमों का मतलब यह नहीं है कि आम लोगों के लिए UPI पेमेंट अब चार्जेबल हो गया है।