नई दिल्ली।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर All India Institute of Medical Sciences, New Delhi एम्स, नई दिल्ली के निदेशक Nikhil Tandon डॉ. निखिल टंडन ने समाज से डॉक्टरों के प्रति अधिक सहानुभूति, सम्मान और सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर भी इंसान हैं और उनसे भी कभी-कभी निर्णय लेने में त्रुटियां हो सकती हैं। ऐसे में समाज को चिकित्सकों को समझने और उनका सहयोग करने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. निखिल टंडन ने कहा कि डॉक्टरों और मरीजों के बीच आपसी विश्वास और समझ को मजबूत करना समय की मांग है। उन्होंने कहा, "समाज को यह समझना होगा कि डॉक्टर भी अन्य लोगों की तरह इंसान हैं। उनसे भी निर्णय लेने में गलतियां हो सकती हैं या कभी-कभी परिस्थितियों के अनुसार लिया गया निर्णय बाद में गलत प्रतीत हो सकता है। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि जब वह निर्णय लिया गया था, तब परिस्थितियां अलग थीं।"
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों, मरीजों और समाज के बीच पारस्परिक सम्मान और समझ विकसित करना बेहद आवश्यक है। इससे न केवल चिकित्सकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि मरीजों को भी अधिक मानवीय और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी।
डॉ. टंडन ने उम्मीद जताई कि यदि समाज डॉक्टरों के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाता है, तो इससे एक अधिक संतुष्ट और सकारात्मक चिकित्सक समुदाय का निर्माण होगा, जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगा।
युवा डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के बीच बढ़ते कार्य तनाव तथा धैर्य की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए एम्स निदेशक ने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक सेवा और जीवन का आह्वान है।
उन्होंने कहा, "मेडिसिन केवल रोजगार या आय का माध्यम नहीं है। किसी व्यक्ति को डॉक्टर तभी बनना चाहिए, जब वह इसे अपना जीवन उद्देश्य और सेवा का माध्यम मानता हो। डॉक्टर बनने और इस पेशे में बने रहने के लिए धैर्य, समर्पण और सहानुभूति अत्यंत आवश्यक है।"
डॉ. टंडन ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में केवल बौद्धिक क्षमता पर्याप्त नहीं होती। एक सफल और संवेदनशील चिकित्सक बनने के लिए मानवीय संवेदनाएं और मरीजों के प्रति सहानुभूति भी उतनी ही जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, "आप अत्यंत बुद्धिमान व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में मानवीय स्पर्श और सहानुभूति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां कड़ी मेहनत, निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। डॉक्टरों को मानसिक और शारीरिक रूप से हमेशा तैयार रहना पड़ता है।"
एम्स निदेशक ने इस दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को भी अधिक सहयोगी और सहायक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए, जिससे डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके और वे बिना अतिरिक्त तनाव के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में डॉक्टरों पर कार्यभार लगातार बढ़ा है। लंबे कार्य घंटे, आपातकालीन परिस्थितियां, मरीजों की बढ़ती संख्या और मानसिक दबाव के कारण चिकित्सकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों की जिम्मेदारी है कि वे डॉक्टरों को आवश्यक समर्थन और सम्मान प्रदान करें।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर डॉ. निखिल टंडन का यह संदेश न केवल चिकित्सा समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को भी यह याद दिलाता है कि डॉक्टर केवल स्वास्थ्य सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान भी हैं, जिन्हें सम्मान, समझ और सहयोग की आवश्यकता है।