Narmada Expenditure Agreement: Congress demands release of white paper, BJP hits back at opposition
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लगभग तीन दशक से जारी पुनर्वास एवं पुनर्बसाहट व्यय विवाद पर बनी सहमति पर सवाल उठाते हुए मध्यप्रदेश सरकार से इस पूरे मामले में श्वेत पत्र जारी करने और विधानसभा में चर्चा कराने की मांग की।
सरोवर परियोजना की निर्माण लागत और संबंधित भुगतान विवाद को लेकर पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश में समझौता हुआ है।
इसमें लंबित धनराशि के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान के रूप में हल किया गया है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि अमित शाह के दबाव में मध्यप्रदेश सरकार ने घुटने टेक दिए हैं और प्रदेश के किसानों, आम नागरिकों तथा राज्य के वैधानिक अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की है।
उन्होंने कह, ‘‘नर्मदा नदी की कुल लंबाई 1,312 किलोमीटर है, जिसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक प्रवाह मध्य प्रदेश में है, इसलिए नर्मदा मैया पर पहला अधिकार मध्यप्रदेश की जनता का है लेकिन इसके बावजूद सरदार सरोवर परियोजना का सबसे अधिक नुकसान भी मध्यप्रदेश ने ही उठाया।’’
कांग्रेस नेता ने बताया कि संभावित 230 प्रभावित गांवों में से 178 गांव मध्यप्रदेश में, जबकि केवल 19 गांव गुजरात में हैं।
पटवारी ने कहा कि बांध के कारण मध्यप्रदेश के लगभग 23,600 परिवार विस्थापित हुए, जबकि गुजरात में यह संख्या लगभग 4,000 परिवार है।
उन्होंने कहा कि इन्हीं नुकसानों के आधार पर पूर्व में हुए समझौते के अनुसार तत्कालीन राज्य सरकार ने 7,669 करोड़ रुपये का दावा प्रस्तुत किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके उलट मध्यप्रदेश सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से गुजरात को लगभग 550 करोड़ रुपये देने पर सहमति जता दी।
पटवारी ने सरकार से पूछा कि इतने बड़े निर्णय पर विधानसभा, विपक्ष या प्रदेश की जनता को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया?
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस इस पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने तथा विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग करती है।’’