Monetary Measures Temporary; Committed to Internationalization of Rupee in the Long Run: RBI
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर ने बुधवार को कहा कि रुपये के मोर्चे पर उठाए गए कदम अस्थायी थे और उन्होंने लंबी अवधि में मुद्रा के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए प्रतिबद्धता जताई।
वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई कि केंद्रीय बैंक इस साल 30 मार्च और एक अप्रैल को लागू किए गए उपायों को पूरी तरह से कब वापस लेगा। ये उपाय मुद्रा बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी को देखते हुए किए गए थे, जिससे अमेरिकी डॉलर की कृत्रिम कमी पैदा हो रही थी।
गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में आरबीआई ने रुपया डेरिवेटिव पर एक अप्रैल के उपायों के एक हिस्से को आंशिक रूप से वापस ले लिया था। इसके तहत अधिकृत डीलरों को निवासी या अनिवासी उपयोगकर्ताओं के लिए भारतीय रुपये से जुड़े गैर हस्तांतरणयोग्य वायदा-विकल्प अनुबंधों की पेशकश फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई है।
शुद्ध खुली पोजीशन पर 10 करोड़ डॉलर की सीमा कब हटाई जाएगी, इस सवाल पर शंकर ने कहा कि आरबीआई रुपया-डॉलर के लिए एक वैश्विक बाजार बनाने और लंबी अवधि में रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ''जो कुछ भी किया गया था, वह एक अस्थायी घटना से निपटने के लिए था, जिसने बाजार में भारी अस्थिरता पैदा कर दी थी। एक बार जब इसका समाधान हो जाएगा, तो हमें अपने पुराने रास्ते पर वापस आ जाना चाहिए।''
डिप्टी गवर्नर ने कहा, ''हमारा विचार है कि दुनिया में कहीं भी कोई भी उपयोगकर्ता जिसे रुपये का जोखिम है, वह उपलब्ध किसी भी उत्पाद का उपयोग करने में सक्षम होना चाहिए।''
यह पूछने पर कि क्या आरबीआई भविष्य में भी ऐसे कदम उठाएगा, शंकर ने स्पष्ट किया कि पिछले महीने की गई कार्रवाई अत्यधिक सट्टेबाजी के कारण थी, न कि डॉलर के मुकाबले घरेलू मुद्रा की मजबूती या कमजोरी के कारण।