मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा से रक्षा-व्यापार को बल

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 08-07-2026
Modi's Australia visit boosts defence trade
Modi's Australia visit boosts defence trade

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस सप्ताह होने वाली ऑस्ट्रेलिया यात्रा से नयी दिल्ली और कैनबरा के बीच संबंध और मजबूत होंगे तथा दोनों देशों को ऐसे समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाने में मदद मिलेगी, जब यह क्षेत्र सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
 
विशेषज्ञों के अनुसार, मोदी की इस यात्रा से दोनों देशों को रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
 
आठ से 10 जुलाई तक मेलबर्न की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। वह गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे, भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में शीर्ष उद्योगपतियों को संबोधित करेंगे और भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मिलेंगे।
 
विशेषज्ञों ने कहा कि दोनों देश अपने संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तथा ऐसे समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है, जब प्रमुख शक्तियों के बीच इस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है।
 
‘ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट’ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और ऑस्ट्रेलिया की पूर्व सीनेटर लिसा सिंह ने इस समय यात्रा के महत्व को रेखांकित किया।
 
उन्होंने ‘पीटीआई भाषा’ को ईमेल के जरिए बताया, ‘‘भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को मजबूत करना न केवल एक-दूसरे के लिए, बल्कि हमारे क्षेत्र के विकासशील देशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि ऑस्ट्रेलिया और भारत सभी के लिए सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाना चाहते हैं।’’
 
सिंह ने रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा, ‘‘ऑस्ट्रेलिया ने अपनी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के माध्यम से हिंद महासागर में अपनी भूमिका को स्वीकार किया है, जबकि भारत इस क्षेत्र में दशकों से अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।’’
 
ऊर्जा क्षेत्र के बारे में सिंह ने कहा, ‘‘यदि ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम की आपूर्ति के माध्यम से भारत को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में सहयोग करता है तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा।’’
 
हालांकि, एएनयू नेशनल सिक्योरिटी कॉलेज के वरिष्ठ शोधार्थी फ्रेडरिक ग्रारे ने अपेक्षाकृत सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पूर्व की यात्राओं में कई वादे किए गए थे, लेकिन उनके अनुरूप परिणाम नहीं मिले।