आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने मंगलवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि हजारों आदिवासी भूमि मालिकों के लिए वैध कोयला खनन को आसान बनाने के उद्देश्य से राज्य को वैधानिक अधिकार दिए जाएं।
नयी दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ बैठक के दौरान संगमा ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 26 के तहत अधिकारों के हस्तांतरण की मांग की।
उन्होंने कहा कि इससे राज्य सरकार को कोयला खनन के लिए स्वीकृति देने और खनन योजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा, ‘‘इस कदम से हजारों छोटे आदिवासी कोयला धारकों को राज्य के भीतर ही कानूनी खनिज रियायतें और आवश्यक अनुमतियां मिल सकेंगी।’’
संगमा ने कहा कि छठी अनुसूची के तहत मेघालय में भूमि और खनिजों का स्वामित्व राज्य सरकार के बजाय व्यक्तियों, कुलों और समुदायों के पास है। इस अनूठी व्यवस्था के कारण मौजूदा मंजूरी प्रक्रिया राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है और व्यवहार में कारगर साबित नहीं होती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2021 की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत निर्धारित 100 हेक्टेयर के न्यूनतम रियायत क्षेत्र की शर्त के कारण अधिकांश वास्तविक आदिवासी कोयला धारक खनन पट्टा हासिल करने से वंचित रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि अप्रैल 2014 में पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा ‘रैट-होल’ कोयला खनन पर रोक लगाए जाने के बाद छोटे पैमाने पर कोयला खनन पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई।
यह प्रतिबंध राज्यभर की कोयला खानों में बड़े पैमाने पर अवैज्ञानिक ‘रैट-होल खनन, पर्यावरणीय क्षरण और बार-बार होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं को देखते हुए लगाया गया था।