नई दिल्ली
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रा के दौरान सामने आई हिंसा, तोड़फोड़ और अव्यवस्था की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों को धार्मिक आस्था से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा हिंदू समाज की आस्था का महत्वपूर्ण पर्व है, लेकिन कुछ लोगों के व्यवहार के कारण इसकी छवि प्रभावित हो रही है।
मीडिया से बातचीत के दौरान मौलाना रशीदी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति वर्दी में तैनात पुलिसकर्मी पर हमला करता है, उसे वाहन से खींचकर पीटता है, या स्कूल जा रहे बच्चों की वैन पर हमला कर उन्हें नुकसान पहुंचाता है, तो ऐसे लोगों को धार्मिक आस्था का प्रतिनिधि नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि इसी तरह एंबुलेंस में तोड़फोड़ करना, मामूली सड़क दुर्घटना के बाद ट्रक का सामान लूट लेना या सार्वजनिक स्थानों पर नशा करना भी किसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं हो सकता। उनके अनुसार, ऐसे कृत्य कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द दोनों के लिए नुकसानदायक हैं।
मौलाना रशीदी ने कहा कि कांवड़ यात्रा एक पवित्र धार्मिक परंपरा है और करोड़ों श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ इसमें भाग लेते हैं। लेकिन यदि कुछ लोग हिंसा, उपद्रव या आपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं, तो उससे पूरी यात्रा की छवि धूमिल होती है।
उन्होंने यात्रा के दौरान डीजे, सड़क पर नृत्य और अन्य आयोजनों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। उनके अनुसार, किसी भी आस्था का सम्मान तभी संभव है जब उससे जुड़े लोग अनुशासन, संयम और जिम्मेदारी का परिचय दें।
मौलाना ने कहा कि उनके विचार में जो लोग भक्ति के नाम पर हिंसा, लूटपाट, नशाखोरी या मारपीट जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, उन्हें वास्तविक श्रद्धालु नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे तत्व धार्मिक आयोजनों का दुरुपयोग करते हैं और उनकी वजह से पूरे समुदाय की छवि प्रभावित होती है।
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग हाथों में डंडे लेकर दूसरों को डराने, धमकाने या हमला करने का प्रयास करते हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक यात्राओं का उद्देश्य शांति, आस्था और सामाजिक सद्भाव का संदेश देना है, न कि भय या हिंसा का वातावरण पैदा करना।
मौलाना रशीदी ने प्रशासन और समाज से अपील की कि कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि अधिकांश कांवड़ यात्री शांतिपूर्वक और श्रद्धा के साथ यात्रा करते हैं, इसलिए कुछ असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के आधार पर पूरे समुदाय या सभी श्रद्धालुओं को नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी धर्म या आस्था का सम्मान तभी बना रह सकता है, जब उससे जुड़े आयोजन कानून, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के दायरे में संपन्न हों।