संसद में व्यवधान से देश और लोगों से जुड़े मामलों पर चर्चा में देरी होती है : सभापति राधाकृष्णन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 20-07-2026
matters concerning the country and its people: Chairman Radhakrishnan
matters concerning the country and its people: Chairman Radhakrishnan

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सदस्यों से उच्च सदन की गरिमा, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने का आह्वान करते हुए आग्रह किया कि वे कामकाज के समय से निपटारे पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि हर व्यवधान से देश और लोगों से जुड़े मामलों पर चर्चा में देरी होती है।

सभापति ने कहा, ‘‘मैं सदन के सभी पक्षों के सदस्यों से अपील करता हूं कि वे इस प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा, अनुशासन और मर्यादा को बनाए रखें। हालांकि संसदीय लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें इस तरह से व्यक्त किया जाना चाहिए कि सदन की पवित्रता बनी रहे। व्यवधानों को इसके कामकाज को बाधित नहीं करने देना चाहिए।’’
 
उन्होंने सत्र के उत्पादक, रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण रहने की कामना की और कहा, ‘‘मैं राज्यसभा के 271वें सत्र की शुरुआत पर आप सभी का भी हार्दिक स्वागत करता हूं। इस सदन की सार्थक चर्चाओं की एक गौरवशाली परंपरा रही है और मुझे विश्वास है कि यह सत्र उस विरासत को आगे बढ़ाएगा। हमारे सामने 19 बैठकें हैं और यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम इस बहुमूल्य समय का उपयोग राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बहस करने और उन पर निर्णय लेने में करें।’’
 
सभापति ने कहा, ‘‘इस सत्र का एक महत्वपूर्ण विधायी और विचार-विमर्श संबंधी एजेंडा है। मैं सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे कामकाज के समय पर निपटारे पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि हर व्यवधान देश और उन लोगों से जुड़े मामलों पर चर्चा में देरी करता है जिनका हम प्रतिनिधित्व करते हैं।’’
 
सभापति ने सदस्यों को सूचित किया कि इस सत्र से उच्च सदन के सचिवालय ने सदस्यों की सीटों पर लगे मल्टी-मीडिया उपकरणों के माध्यम से नौ भाषाओं में कार्यवाही का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित अनुवाद शुरू किया है। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे इस सुविधा का सभी 22 अनुसूचित भाषाओं तक विस्तार किया जाएगा। उन्होंने इस व्यवस्था में सुधार के लिए सदस्यों से अपनी प्रतिक्रिया देने को भी कहा।