Mathura jail inmates are making skin- and environment-friendly 'herbal gulal' from fruits and vegetables.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मथुरा जिला कारागार में बंदी इन दिनों फल और सब्जियों से हर्बल गुलाल बना रहे हैं, जो न केवल त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है।
जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि अब जेलों को बंदी सुधार गृह के रूप में तब्दील किया जा रहा है जिससे उम्मीद की जा रही है कि सजा पूरी कर जेल से बाहर निकलने वाले बंदी अपराध की राह छोड़कर खुद के उद्यम से न केवल एक सम्मानजनक जिंदगी जी सकेंगे, बल्कि औरों को भी रोजगार देने लायक कौशल हासिल कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इन्हीं कार्यक्रमों के तहत बंदियों को हर्बल गुलाल बनाने का प्रशिक्षण दिलाया गया है। जिसके बाद वे बड़े पैमाने पर गाजर, चुकंदर, पालक आदि सब्जियों और हल्दी से लाल, हरा, पीला गुलाल तैयार कर रहे हैं।
जेल प्रशासन इस गुलाल की बिक्री के लिए मुलाकात घर के समीप स्टॉल लगवाएगा, जहां 100 व 200 ग्राम की पैकिंग में हर प्रकार के गुलाल की बिक्री की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 22 फरवरी (रविवार) को डैम्पीयर नगर स्थित पांचजन्य प्रेक्षागृह में लगाए जाने वाले विधिक साक्षरता शिविर में भी बंदियों द्वारा निर्मित प्राकृतिक गुलाल की बिक्री की जाएगी।
इस शिविर में बंदियों द्वारा ही बनाई गईं ठाकुरजी की पोशाकों, हथकरघा से बनी साड़ी, तौलिया आदि उत्पादों का भी प्रदर्शन व बिक्री की जाएगी।
उन्होंने बताया कि फिलहाल करीब 24 विचाराधीन एवं सजायाफ्ता बंदी गुलाल बना रहे हैं और लगभग इतनी ही महिला बंदी ‘ब्यूटीशियन’ का प्रशिक्षण ले रही हैं।