आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत में मान्यता प्राप्त ऊंटों की नौ नस्लों में शामिल दुर्लभ मालवी (सफेद) ऊंट विलुप्त होने के गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। इस नस्ल के अब केवल 102 ऊंट ही शेष बचे हैं, जिसे बचाने के लिए राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) ने विशेष संरक्षण एवं प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
वर्ष 2019 की पशुधन गणना के अनुसार, मालवी ऊंटों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है, जिसके कारण यह नस्ल संकटग्रस्त श्रेणी में पहुंच गई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, किसी भी ऊंट की नस्ल में यदि प्रजनन योग्य मादा ऊंटों की संख्या 300 से कम रह जाती है, तो उसे विलुप्त होने के खतरे वाली नस्ल माना जाता है। मालवी के अलावा मेवाड़ी और मेवाती नस्ल भी इसी श्रेणी में आती हैं।
इस संकट से निपटने के लिए राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) ने विशेष प्रजनन एवं संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
एनआरसीसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश ने कहा, ‘‘हमने तीन नर और नौ मादाओं सहित 12 मालवी ऊंट खरीदे हैं तथा उनकी संख्या बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया है।’’