आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
हिमाचल प्रदेश में शनिवार को मध्यम से भारी बारिश के कारण शिमला में भूस्खलन हुआ, सांगला में पिछले साल निर्मित एक अस्थायी पुल (बेली ब्रिज) ढह गया और किन्नौर जिले में बाढ़ का पानी एकमंजिला मकान में घुस गया जिससे आसपास के कई अन्य मकानों पर भी खतरा मंडराने लगा है।
शिमला शहर के बोथवेल क्षेत्र में संजौली कॉलेज के पास सड़क के नीचे बनी सुरक्षा दीवार शनिवार तड़के ढह गई और उसका मलबा नीचे बने आवासीय मकानों की ओर जा गिरा।
अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन और अन्य विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम ने इस इलाके में एक निजी निर्माण परियोजना की अनुमति दी थी।
उन्होंने कहा कि इसके लिए खुदाई की गई थी, लेकिन लगातार बारिश के कारण जमीन कमजोर हो गई और भूस्खलन हो गया।
लोगों ने निर्माण कार्य तुरंत रोकने और पूरे इलाके का भू-वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि तीन से चार इमारतों को खतरा है और कुछ घरों तक जाने का रास्ता भी टूट गया है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि इसी जगह जून 2025 में भी भूस्खलन हुआ था और उस समय पहाड़ी से मलबा व बड़े पत्थर नीचे बने घरों पर गिर गए थे। उन्होंने कहा कि बार-बार भूस्खलन होने के कारण वे डर के माहौल में जी रहे हैं।
शनिवार को शिमला के बाहरी इलाके मोहल राजहाना में भी भूस्खलन हुआ और दो खड़ी हुई गाड़ियां बड़े पत्थरों व मलबे के नीचे दब गईं।
किन्नौर जिले में लगातार भारी बारिश के कारण लिप्पा झरने का जलस्तर बढ़ गया, जिसके कारण लिप्पा बस स्टैंड के पास एक मंजिला मकान में बाढ़ का पानी भर गया और कई अन्य घरों के लिए भी खतरा पैदा हो गया।