मध्य प्रदेश में छह साल में 2.69 लाख महिलाएं लापता, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार से मांगा जवाब

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 25-02-2026
2.69 lakh women missing in Madhya Pradesh in six years, Jamaat-e-Islami Hind demands answers from the government
2.69 lakh women missing in Madhya Pradesh in six years, Jamaat-e-Islami Hind demands answers from the government

 

नई दिल्ली

मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश आंकड़ों ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार पिछले छह वर्षों में राज्य से 2,69,500 महिलाएं और लड़कियां लापता हुई हैं। इनमें से 50 हजार से अधिक का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

इन आंकड़ों पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के महिला विभाग की राष्ट्रीय सचिव रहमतुन्निसा ए. ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हर संख्या के पीछे एक परिवार का दर्द और असुरक्षा की कहानी छिपी है।

उन्होंने बयान में कहा कि हजारों मामलों का लंबे समय तक लंबित रहना प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है। खास तौर पर इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में बढ़ती गुमशुदगी की घटनाएं शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। उनके अनुसार जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग और नियमित सुरक्षा ऑडिट की तत्काल जरूरत है।

रहमतुन्निसा ए. ने कहा कि यह संकट केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताजनक स्थिति है। हर साल देश में बड़ी संख्या में महिलाएं और किशोरियां लापता होती हैं और कई मामलों का समाधान नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने गुमशुदगी के पीछे गरीबी, घरेलू हिंसा, बाल विवाह, मानव तस्करी, असुरक्षित प्रवास और बेरोजगारी जैसे कारणों की ओर भी इशारा किया। उनका कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए बहु आयामी रणनीति की जरूरत है, जिसमें पुलिस, सामाजिक कल्याण विभाग और सामुदायिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय हो।

संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर एक कार्ययोजना बनाने की मांग की है। इसमें एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट को मजबूत करना, डेटा की पारदर्शिता बढ़ाना, समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना और बरामद महिलाओं के पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था शामिल होनी चाहिए।

रहमतुन्निसा ए. ने सिविल सोसाइटी और धार्मिक संगठनों से भी अपील की कि वे पीड़ित परिवारों का समर्थन करें और समाज में जागरूकता बढ़ाएं।इन आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा पर ठोस और त्वरित कदम उठाना अब समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।