आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल उच्च न्यायालय ने विड़िण्गम बंदरगाह के खिलाफ प्रदर्शनों के लिए धन मुहैया कराने के आरोप में दो गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं करने के केंद्र के फैसले को रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा कि किसी विरोध प्रदर्शन को आर्थिक सहायता देना विदेशी धन का दुरुपयोग या उसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना नहीं माना जा सकता।
इन एनजीओ पर विड़िण्गम समुद्री बंदरगाह के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को आर्थिक मदद देने का आरोप है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान के तहत विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है इसलिए प्रदर्शनकारियों को दी गई आर्थिक मदद को विदेशी धन का किसी अवांछित उद्देश्य के लिए या जनहित के खिलाफ इस्तेमाल नहीं माना जा सकता और न ही इसे एफसीआरए के किसी प्रावधान का उल्लंघन माना जा सकता है।
अदालत ने कहा, ‘‘जब विरोध करने का अधिकार संवैधानिक रूप से प्राप्त है, तो इस अधिकार के इस्तेमाल को ‘अवांछित उद्देश्य’ या जनहित के खिलाफ नहीं माना जा सकता। एफसीआरए की धारा 12(4)(ए)(ii) में इस्तेमाल ‘अवांछित उद्देश्य’ शब्द का अर्थ सरकार या राजनीतिक सत्ता को नापसंद किसी उद्देश्य के रूप में नहीं लगाया जा सकता।’’
उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त के अपने आदेश में कहा है, ‘‘किसी परियोजना के खिलाफ असहमति जताने या अपनी शिकायत रखने वाले लोगों द्वारा किया गया शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन केवल राजनीतिक असहमति के कारण ‘अवांछित उद्देश्य’ नहीं माना जा सकता।’’
अदालत ने यह भी कहा कि संविधान प्रदत्त अधिकार के इस्तेमाल को विरोध-प्रदर्शन या असहमति के प्रति ‘‘कार्यपालिका या प्रशासन की नापसंदगी’’ के आधार पर ‘अवांछित मकसद’ या जनहित के खिलाफ नहीं कहा जा सकता।
आदेश में कहा गया है, ‘‘इसलिए, अगर यह मान भी लिया जाए कि प्रदर्शनकारियों को कुछ आर्थिक मदद दी गई थी तो भी यह विदेशी योगदान का किसी गलत उद्देश्य या जनहित के खिलाफ इस्तेमाल नहीं कहा जा सकता और न ही इसे एफसीआरए के किसी प्रावधान का उल्लंघन माना जा सकता है।’’