आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करने वाली समिति की रिपोर्ट बुधवार को राज्यसभा में पेश की गई। न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित रूप से बेहिसाब नकदी मिलने के मामले में उन्हें पद से हटाने की कार्यवाही शुरू की गई थी।
राज्यसभा के महासचिव पी सी मोदी ने जांच समिति की दो खंडों वाली रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। इसके साथ ही जांच के दौरान दर्ज किए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य भी पेश किए गए।
तीन सदस्यीय जांच समिति ने मई में अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दी थी।
बिरला ने 12 अगस्त, 2025 को, न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से कथित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले की जांच के लिए इस समिति का गठन किया था।
लोकसभा की बुधवार की कार्यसूची के अनुसार, निचले सदन के महासचिव भी रिपोर्ट के दोनों खंडों और मौखिक साक्ष्यों को सदन के पटल पर रखेंगे।