Jamshedpur man joins crew of LPG vessel that returned from West Asia, family heaves a sigh of relief
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के बाद गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंचे भारतीय ध्वज वाले एलपीजी पोत ‘शिवालिक’ के चालक दल में झारखंड के जमशेदपुर के अंश त्रिपाठी भी शामिल थे, जिनके लौटने पर परिवार ने राहत की सांस ली।
अंश त्रिपाठी के पिता मिथिलेश त्रिपाठी ने कहा कि अंश उनका इकलौता बेटा है जो पोत पर सेकंड इंजीनियर के रूप में काम करता है। उस पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे से यात्रा के दौरान जहाज के तकनीकी संचालन की निगरानी करने की जिम्मेदारी थी।
मिथिलेश त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे से आखिरी बार लगभग चार से पांच दिन पहले व्हाट्सऐप कॉल पर बात की थी। उस वक्त पोत कतर से रवाना हो रहा था।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘उन्हें मुख्यालय से हरी झंडी मिलने तक होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया गया था। भारत सरकार सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर रही थी।’’
भारतीय वायु सेना के पूर्व फ्लाइट इंजीनियर मिथिलेश त्रिपाठी ने बाद में जमशेदपुर के पास जादुगोड़ा स्थित यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में काम किया। वर्तमान में वह जमशेदपुर के परडीह के पास एक आवासीय सोसाइटी में रहते हैं।
अपने बेटे के बारे में बात करते हुए त्रिपाठी ने बताया कि अंश ने जमशेदपुर और जादुगोड़ा में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर बीआईटी (बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की तथा बाद में कोच्चि से मरीन इंजीनियर के रूप में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने लगभग 2014-15 में शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में काम करना शुरू किया।
त्रिपाठी ने बताया, ‘‘कतर से निकलने से पहले अंश ने मुझे बताया कि वे हिंद महासागर की ओर जा रहे हैं। उसने बस इतना ही कहा।’’
उन्होंने बताया कि अंश ने उनसे पोत पर सवार चालक दल के सदस्यों की संख्या के बारे में कोई चर्चा नहीं की।