आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली
देश की प्रमुख साहित्यिक संस्था Sahitya Akademi ने सोमवार को वर्ष 2025 के लिए अपने प्रतिष्ठित Sahitya Akademi Award की घोषणा कर दी। ये पुरस्कार संस्था द्वारा मान्यता प्राप्त 24भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए दिए जाते हैं। इस वर्ष विभिन्न विधाओं में रचनाओं का चयन किया गया है, जिनमें आठ कविता संग्रह, चार उपन्यास, छह कथा संग्रह, दो निबंध, एक साहित्यिक आलोचना, एक आत्मकथा और दो संस्मरण शामिल हैं।
उर्दू भाषा की श्रेणी में इस बार जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध कवि Preet Pal Singh Betab को उनकी पुस्तक “सफर जारी है” के लिए सम्मानित किया गया है। बेताब समकालीन उर्दू कविता के प्रमुख प्रतिनिधि माने जाते हैं और उनकी रचनाओं में सामाजिक संवेदनाओं, मानवीय रिश्तों और जीवन के विविध अनुभवों की गहरी झलक मिलती है।
#साहित्यअकादेमी #पुरस्कार2025 की 24 मान्यता प्राप्त भाषाओं में घोषणा।@rashtrapatibhvn @VPIndia @PMOIndia @gssjodhpur @Rao_InderjitS @MinOfCultureGoI @secycultureGOI pic.twitter.com/bg6ItmSpWE
— Sahitya Akademi (@sahityaakademi) March 16, 2026
प्रीत पाल सिंह बेताब की साहित्यिक यात्रा काफी समृद्ध रही है। इससे पहले उनके ग़ज़ल और कविता संग्रह “पेशखेमा” को Jammu and Kashmir Academy of Art, Culture and Languages द्वारा सर्वश्रेष्ठ पुस्तक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें सुभद्रा कुमारी चौहान जन्म शताब्दी सम्मान, जम्मू-कश्मीर सिद्दीकी मेमोरियल अवार्ड, मोहम्मद दीन बंदे अवार्ड, जम्मू-कश्मीर रत्न अवार्ड और मोहसिन उर्दू अवार्ड जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है।
अन्य भाषाओं में भी कई प्रमुख लेखकों को इस वर्ष साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है। अंग्रेज़ी भाषा की श्रेणी में पूर्व राजनयिक और लेखक Navtej Sarna को उनके उपन्यास “Crimson Spring” के लिए सम्मानित किया जाएगा। वहीं हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका Mamta Kalia को उनके संस्मरण “जीते जी इलाहाबाद” के लिए चुना गया है, जिसमें इलाहाबाद के साहित्यिक और सांस्कृतिक जीवन का जीवंत चित्रण मिलता है।
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तमिल भाषा में साहित्यिक आलोचना की श्रेणी में लेखक S. A. Tamilselvan को उनकी पुस्तक “थमिज़ सिरकथियान थडंगल” के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसी तरह बंगाली में प्रशांत बंद्योपाध्याय की कविता संग्रह “श्रेष्ठ कबिता” और गुजराती में योगेश वेदिया की “भट खड़की” को भी पुरस्कार के लिए चुना गया है।
कन्नड़ भाषा में अमरीश नवगादोनी की “दादा सिरिसु तांडे”, मलयालम में N. Prabhakaran के उपन्यास “माया मानुषियार”, मराठी में राजू बाविस्कर की “कल्याणिलिया रेशा” और तेलुगु में नंदिनी सुधा रेड्डी की कविता संग्रह “अनिमिषा” को भी इस वर्ष सम्मानित किया जाएगा।
पंजाबी में लेखक जिंदर की “सेफ्टी किट”, राजस्थानी में जीतेंद्र कुमार सोनी की “भरखामा” और सिंधी भाषा में भगवान अटलानी की पुस्तक “वाघु” को भी साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025के लिए चुना गया है। इसके अलावा संथाली में सुमित्रा सोरेन की “मद बरना चने सान अंग सगाई”, संस्कृत में साहू भद्रशदास की “प्रस्थान चतुष्टे ब्रह्मघोष”, उड़िया में गिरिजा कुमार बलियार सिंह की “पदपुराण”, नेपाली में प्रकाश भट्टराई की “नेपाली परंपरा संस्कृति रा सुभीता को डकोटी” और मणिपुरी में होबम नलानी की आत्मकथा “कंगलामद्रिबा इफोट” को भी सम्मानित किया जाएगा।
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साहित्य अकादमी के अनुसार इन पुस्तकों का चयन प्रतिष्ठित जूरी सदस्यों की सिफारिशों के आधार पर किया गया और बाद में संस्था के सक्षम प्राधिकारी द्वारा इसे मंजूरी दी गई। चयन प्रक्रिया में साहित्यिक गुणवत्ता, मौलिकता और भाषा के विकास में योगदान जैसे मानदंडों को प्रमुखता दी गई।
पुरस्कार विजेताओं को एक विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को एक लाख रुपये की नकद राशि, एक शॉल और तांबे की पट्टिका प्रदान की जाएगी। यह सम्मान समारोह 31मार्च को आयोजित किया जाएगा।
गौरतलब है कि इस वर्ष पुरस्कारों की घोषणा सामान्य समय से करीब तीन महीने बाद हुई है। दिसंबर 2025 में इन पुरस्कारों की घोषणा के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को Ministry of Culture India के निर्देशों पर अचानक रद्द कर दिया गया था। उस समय मंत्रालय ने पुरस्कार प्रणाली के संभावित पुनर्गठन का संकेत दिया था।
अब प्रक्रिया पूरी होने के बाद साहित्य अकादमी ने आधिकारिक रूप से पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। साहित्य जगत में इन पुरस्कारों को अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है और हर वर्ष देशभर के लेखकों के लिए यह सम्मान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।