आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच मंगलवार को 1956 के स्वेज संकट का उल्लेख किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र में उस वक्त के भारतीय प्रतिनिधि वीके कृष्ण मेनन ने इस मामले के समाधान के लिए किए गए कूटनीतिक प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वर्ष 1956 में पहले इजराइल तथा बाद में ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा मिस्र पर किया गया आक्रमण स्वेज संकट के नाम से जाना जाता है। यह आक्रमण स्वेज नहर पर पश्चिमी देशों का नियंत्रण पुनः स्थापित करने तथा मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्देल नासिर को सत्ता से हटाने के उद्देश्य से किया गया था।
रमेश ने यह भी याद दिलाया कि नवंबर 1956 की शुरुआत में मिस्र पर आक्रमण रुकने के बाद, मिस्र-इजराइल सीमा पर सिनाई और गाजा के साथ एक संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल तैनात किया गया था जिसमें भारत सहित 10 देशों के सैनिक शामिल थे।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘दुनिया होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से जूझ रही है। 70 साल पहले, देश उस समस्या से जूझ रहा था जिसे स्वेज संकट के नाम से जाना जाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘26 जुलाई 1956 को मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इससे पश्चिमी देशों में भारी हंगामा मच गया और युद्ध के बादल मंडराने लगे। संकट को सुलझाने के कूटनीतिक प्रयास के केंद्र में जो व्यक्ति था वह कोई और नहीं बल्कि वीके कृष्ण मेनन थे। वह सराहनीय रूप से सफल हुए लेकिन केवल कुछ समय के लिए।’’