जम्मू-कश्मीर: फिर शुरू हुई बारिश के कारण पुंछ-राजौरी में बचाव अभियान धीमा पड़ा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 20-07-2026
Jammu and Kashmir: Rains resume again, slowing down rescue operations in Poonch-Rajouri
Jammu and Kashmir: Rains resume again, slowing down rescue operations in Poonch-Rajouri

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिलों में सोमवार तड़के फिर शुरू हुई भारी बारिश के कारण बचाव अभियान बुरी तरह प्रभावित हो गया। एक दिन पहले आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन में 12 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य अब भी लापता हैं।

अधिकारियों ने बताया कि सीमावर्ती दोनों जिलों में सोमवार तड़के करीब तीन बजे फिर तेज बारिश शुरू हुई, जो अंतिम सूचना तक लगातार जारी रही। इसके कारण प्रभावित क्षेत्रों में तलाश और बचाव अभियान में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
 
उन्होंने बताया कि उफनते नालों, फिसलन भरी जमीन और कम दृश्यता के कारण बचाव दलों की आवाजाही बाधित हो रही है। लापता लोगों का पता लगाने के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं।
 
दोनों जिलों में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में रविवार को कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई। वहीं, जल शक्ति विभाग के एक कर्मचारी समेत सात लोग अब भी लापता हैं।
 
अधिकारियों के अनुसार, प्रतिकूल मौसम के बावजूद पुलिस, सेना, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), नागरिक सुरक्षाकर्मी और स्थानीय स्वयंसेवक राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
 
उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
 
अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन स्थिति पर लगातार कड़ी नजर बनाए हुए है।
 
मौसम विभाग ने 23 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इसके मद्देनजर जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने तथा नदियों, झरनों, नालों और अन्य जलाशयों के निकट नहीं जाने की अपील की है।
 
जम्मू सहित कई अन्य जिलों में भी मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई। हालांकि, फिलहाल किसी नए जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
 
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को सभी जिला प्रशासनों को 24 जुलाई तक प्रत्येक छह घंटे में स्थिति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया, ताकि हालात पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके और राहत एवं बचाव कार्यों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो।