Jammu and Kashmir: मृतप्राय Namda Rug Art हुई पुनर्जीवित, ब्रिटेन को पहले बैच का किया निर्यात

Story by  राकेश चौरासिया | Published by  [email protected] | Date 17-07-2023
जम्मू-कश्मीरः मृतप्राय नमदा गलीचा कला हुई पुनर्जीवित, ब्रिटेन को पहले बैच का किया निर्यात
जम्मू-कश्मीरः मृतप्राय नमदा गलीचा कला हुई पुनर्जीवित, ब्रिटेन को पहले बैच का किया निर्यात

 

आवाज-द वॉयस / नई दिल्ली

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पहल के तहत, कश्मीर के नमदा शिल्प को पुनर्जीवित किया जा रहा है और यूनाइटेड किंगडम (यूके) को निर्यात के लिए नमदा कला उत्पादों का पहला बैच भेज दिया गया है. भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को यूनाइटेड किंगडम (यूके) को निर्यात के लिए नमदा कला उत्पादों के पहले बैच को हरी झंडी दिखाई.

हस्तशिल्प एवं कालीन क्षेत्र कौशल परिषद के अध्यक्ष अरशद मीर ने कहा कि नमदा कला की दुनिया में हमेशा भारी मांग रही, लेकिन पिछली सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और कला लगभग खत्म हो रही थी.

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को धन्यवाद, जिन्होंने लुप्त हो रही नमदा कला के पुनरुद्धार पर ध्यान केंद्रित किया. इसने न केवल घाटी में युवाओं को आत्म-सशक्त किया है, बल्कि उन्हें दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक मंच भी प्रदान किया है.’’

 


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नमदा कला की प्रशिक्षक रजिया सलीम ने कहा, ‘‘नमदा कला के पुनरुद्धार ने कश्मीर में लड़कियों को आशा दी है, जो मुख्य रूप से इससे लाभान्वित हो रही हैं. सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने के लिए न केवल आवश्यक सहायता प्रदान की बल्कि हमें इसे यूरोपीय देशों में निर्यात करने के लिए एक मंच भी दिया. ऐसे देश जहां इसकी भारी मांग है.’’

एक बयान के अनुसार, मीर हस्तशिल्प और श्रीनगर कालीन प्रशिक्षण और बाजार केंद्र जैसे स्थानीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से जम्मू और कश्मीर में इस पायलट परियोजना का सफल कार्यान्वयन, कौशल विकास को बढ़ावा देने और आकर्षित करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की शक्ति का उदाहरण देता है.

नमदा शिल्प सामान्य बुनाई प्रक्रिया के बजाय फेल्टिंग तकनीक के माध्यम से भेड़ के ऊन से बना गलीचा है. बयान में कहा गया है कि कच्चे माल की कम उपलब्धता, कुशल जनशक्ति और विपणन तकनीकों की कमी के कारण 1998 और 2008 के बीच इस शिल्प के निर्यात में लगभग 100 प्रतिशत की गिरावट आई.

 


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इसलिए, पीएमकेवीवाई के तहत इस विशेष परियोजना के माध्यम से, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने इस लुप्तप्राय शिल्प को संरक्षित करने के लिए एक अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया है. परियोजना को प्रशिक्षण के 3 चक्रों में 25 बैचों में लागू किया गया है. प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग साढ़े तीन महीने का था, जिसके परिणामस्वरूप चक्र लगभग 14-16 महीनों में पूरा हो गया.

वर्ष 2021 में, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने घाटी के शिल्प समूहों में कारीगरों और बुनकरों के कौशल और उन्नयन के माध्यम से कश्मीर के नामदा शिल्प को पुनर्जीवित करने पर पायलट विशेष परियोजना शुरू की.

इसके अलावा, इस पहल के तहत, लगभग 2,200 उम्मीदवारों को नमदा शिल्प की कला में प्रशिक्षित किया गया है, जो इस पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने और स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को सशक्त बनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. इस परियोजना ने कश्मीर के छह जिलों, श्रीनगर, बारामूला, गांदरबल, बांदीपोरा, बडगाम और अनंतनाग में व्यक्तियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया है.

 


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