निखत जरीन: रूढ़ियों को तोड़कर बनीं बॉक्सिंग की विश्व चैंपियन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 04-04-2026
Nikhat Zareen: An Inspiring Journey—From Breaking Stereotypes to Becoming a World Champion
Nikhat Zareen: An Inspiring Journey—From Breaking Stereotypes to Becoming a World Champion

 

आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली  

Nikhat Zareen का नाम आज भारतीय मुक्केबाज़ी में संघर्ष, साहस और सफलता की मिसाल बन चुका है। 14 जून 1996 को तेलंगाना के निज़ामाबाद में जन्मी निखत जरीन एक साधारण परिवार से निकलकर इंडियन बॉक्सिंग के इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रही हैं। तीन बहनों के साथ एक पारंपरिक मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ीं निखत के लिए यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था, लेकिन उनके मजबूत इरादों और पिता मोहम्मद जमील अहमद के समर्थन ने उन्हें हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी।

निखत के पिता स्वयं खेलों से जुड़े रहे थे और उन्होंने ही अपनी बेटी को स्पोर्ट्स से परिचित कराया। शुरुआत में निखत ने रनिंग ट्रैक पर कदम रखा और एथलेटिक्स में हिस्सा लेना शुरू किया, लेकिन उनके जीवन ने निर्णायक मोड़ तब लिया जब उन्होंने एक स्थानीय स्टेडियम में यह देखा कि बॉक्सिंग रिंग में लड़कियों की मौजूदगी न के बराबर है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बॉक्सिंग सिर्फ लड़कों के लिए ही क्यों मानी जाती है? इसी सवाल ने उनके भीतर एक जिद पैदा की और उन्होंने तय कर लिया कि वह इस स्टीरियोटाइप को तोड़ेंगी।

रनिंग ट्रैक से बॉक्सिंग रिंग तक का उनका सफर साहस से भरा था। शुरुआत में उन्होंने अपने पिता के साथ ट्रेनिंग की। बाद में उन्होंने स्थानीय जिम में लड़कों के साथ स्पैरिंग की, जहाँ अधिकतर लड़कों का दबदबा था। कई बार उन्हें ताने भी सुनने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना था कि अगर उन्हें बेहतर बनना है तो उन्हें बेहतर प्रतिद्वंद्वियों के साथ अभ्यास करना होगा। यही सोच उन्हें आगे लेकर गई। इसके बाद वह विशाखापत्तनम स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की सुविधा से जुड़ीं, जहाँ द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच आईवी राव के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी तकनीक और खेल को और निखारा।

निखत की प्रतिभा पहली बार 2009 में राष्ट्रीय स्तर पर चमकी, जब उन्होंने सब-जूनियर नेशनल खिताब जीता। इसके बाद 2011 में उन्होंने जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। यह उनके करियर की बड़ी उपलब्धि थी। तीन साल बाद उन्होंने युवा विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक भी जीता। इन शुरुआती सफलताओं ने यह संकेत दे दिया था कि भारत को एक नई महिला मुक्केबाज़ी स्टार मिल चुकी है।

हालांकि उनके करियर में उतार-चढ़ाव भी आए। चयन को लेकर विवाद और बड़े टूर्नामेंट में मौका न मिलने जैसे कठिन दौर भी उन्होंने देखे। लेकिन निखत ने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और खुद को मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत बनाया। उनका मानना था कि असली चैंपियन वही होता है जो मुश्किल समय में भी धैर्य बनाए रखे।

साल 2022 उनके करियर का स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ, जब उन्होंने विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस जीत ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। इसके बाद 2023 में उन्होंने एक बार फिर विश्व चैंपियन बनकर साबित किया कि उनकी सफलता कोई संयोग नहीं थी। लगातार दो बार विश्व चैंपियन बनना उनके अनुशासन, आत्मविश्वास और समर्पण का परिणाम था। इसके अलावा 2022 में उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता और देश को गौरवान्वित किया।

उन्होंने अपने मुक्केबाज़ी करियर की अंतरराष्ट्रीय शुरुआत 2011 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर की थी और तब से लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने दमदार प्रदर्शन से पहचान बनाई है। मौजूदा समय में निखत जरीन भारत की स्टार मुक्केबाज़ मानी जाती हैं, क्योंकि उन्होंने कई बार देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा ऊँचा किया है।

विश्व मुक्केबाज़ी कप 2025 में गोल्ड मेडल जीतने के बाद निखत ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पदक उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद वह फाइनल तक पहुंची हैं और गोल्ड मेडल जीता है। एशियन गेम्स के बाद किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह उनका पहला स्वर्ण पदक था, जिससे वह बेहद खुश हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि वह आगे भी इसी तरह खेलती रहेंगी और भारत के लिए पदक जीतती रहेंगी।

रिंग के बाहर भी निखत की सफलता उल्लेखनीय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2024 तक उनकी अनुमानित नेट वर्थ लगभग 10 से 15 करोड़ रुपये (करीब 1.2 से 1.8 मिलियन डॉलर) आंकी गई है। उनकी आय का प्रमुख स्रोत अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में जीत, विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में मिले सरकारी नकद पुरस्कार और एनएमडीसी लिमिटेड जैसे ब्रांड्स के साथ एंडोर्समेंट डील्स हैं। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली खिलाड़ी के लिए यह उपलब्धि दर्शाती है कि खेल के माध्यम से भी आर्थिक सशक्तिकरण संभव है।

 

निखत जरीन की कहानी केवल पदकों की कहानी नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सोच को बदलने की कहानी है। उन्होंने साबित किया कि लड़कियाँ भी बॉक्सिंग जैसे कठिन खेल में विश्व विजेता बन सकती हैं। आज वह लाखों युवतियों के लिए प्रेरणा हैं, जो पारंपरिक बाधाओं को तोड़कर अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। निखत ने दिखा दिया कि यदि परिवार का साथ, आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। उनका सफर संघर्ष से सफलता तक की ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करता रहेगा।