Indian students face uncertainty as US formalises rule ending flexible 'duration of status' visa system
वॉशिंगटन
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने नया आव्रजन नियम औपचारिक रूप से लागू कर दिया है, जिसके तहत F-1 छात्र वीज़ा, J-1 एक्सचेंज वीज़ा और I वीज़ा (विदेशी पत्रकारों के लिए) पर रहने की अधिकतम अवधि एक बार में चार साल तय कर दी गई है। यह नियम 15 सितंबर 2026 से लागू होगा और इससे बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों व पेशेवरों पर असर पड़ सकता है।
नए नियम के तहत दशकों से लागू लचीली 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (Duration of Status) व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। पहले अंतरराष्ट्रीय छात्र अपने कोर्स की अवधि तक, जब तक वे वीज़ा की शर्तों का पालन करते थे, अमेरिका में रह सकते थे। अब उन्हें अधिकतम चार साल तक ही रहने की अनुमति मिलेगी।
यदि किसी छात्र को डिग्री पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए, तो उसे DHS से औपचारिक रूप से अवधि बढ़ाने की अनुमति लेनी होगी या फिर अमेरिका से बाहर जाकर नए स्वीकृत वीज़ा के साथ दोबारा प्रवेश करना होगा। पहले यह अधिकार विश्वविद्यालयों के पास था, लेकिन अब अंतिम फैसला अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों के हाथ में होगा।
नए नियम में पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली ग्रेस पीरियड भी घटा दी गई है। पहले F-1 वीज़ा धारकों को अमेरिका छोड़ने, दूसरे संस्थान में दाखिला लेने या वीज़ा बदलने के लिए 60 दिन मिलते थे, जिसे अब घटाकर 30 दिन कर दिया गया है। साथ ही, संस्थान बदलने और कोर्स ट्रांसफर के नियम भी सख्त किए गए हैं।
भारत सरकार ने कहा है कि वह इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वीज़ा और आव्रजन नीति किसी भी देश का संप्रभु अधिकार है, लेकिन भारतीय छात्रों और यात्रियों को यदि किसी तरह की कठिनाई होती है तो भारत सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए अमेरिकी प्रशासन के साथ मामला उठाएगी।
भारत से हर साल सबसे अधिक छात्र अमेरिका पढ़ने जाते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2023-24 शैक्षणिक वर्ष में लगभग 3.3 लाख भारतीय छात्र अमेरिकी संस्थानों में पढ़ रहे थे। अमेरिका में करीब 5 लाख J-1 एक्सचेंज विजिटर और 37,000 विदेशी मीडिया कर्मी भी मौजूद हैं।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य छात्र वीज़ा के दुरुपयोग को रोकना और विदेशी नागरिकों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि, नए नियमों ने भारतीय छात्रों और अन्य अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के बीच भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।