India wants to become strong so that no one can impose their conditions on it: Vice President
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि भारत दुनिया का “सबसे शक्तिशाली” देश बनना चाहता है, न तो किसी पर प्रभुत्व जमाने के लिए और न ही अन्य देशों पर अनुचित नियम थोपने के लिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी भारत पर अपनी शर्तें थोपने की हिमाकत न करे।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज केवल प्रौद्योगिकी को अपनाने वाला देश नहीं है, बल्कि प्रौद्योगिकी के निर्माता के रूप में उभर रहा है। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने देश में उद्यमशीलता के माहौल को जीवंत और सहायक बनाया है।
उपराष्ट्रपति यहां सीएमआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे।
राधाकृष्णन ने कहा, “भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर होगा...हम सबसे शक्तिशाली बनना चाहते हैं, अन्य देशों पर प्रभुत्व स्थापित करने या अन्य देशों पर अनुचित नियम थोपने के लिये नहीं। बल्कि, भारत माता पर कोई भी अपनी शर्तें थोपने की हिम्मत न करे, इसीलिए हम दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनना चाहते हैं।”
उन्होंने कहा कि आज का वैश्विक परिदृश्य चुनौतियों से भरा हुआ है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा खतरे, प्रौद्योगिकी तक समान पहुंच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नैतिक उपयोग कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उपराष्ट्रपति ने कहा, “यह चुनौतियां नवाचार, उद्यमिता और नेतृत्व के लिए भी अविश्वसनीय अवसर प्रदान करती हैं।”