आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ब्रोकरेज कंपनी बर्नस्टीन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम लिखे एक खुले पत्र में आगाह किया कि यदि भारत संरचनात्मक सुधारों, विशेषकर रोजगार, विनिर्माण एवं नवाचार में तेजी नहीं लाता है तो हाल के आर्थिक लाभ व्यर्थ हो सकते हैं।
इसमें कहा गया है, ‘‘ पिछले छह वर्ष दिखाते हैं कि जब नीतियां समन्वित होती हैं तो भारत क्या कर सकता है। लेकिन साथ ही एक जोखिम भी है..., यह मान लेना कि हाल की सफलता आगे भी जारी रहेगी और इस बात को कम आंकना कि अभी कितना काम बाकी है।’’
पत्र में पूंजीगत व्यय की ओर झुकाव से प्रेरित मजबूत वृहद स्थिरता और आय वृद्धि का उल्लेख किया गया।
बर्नस्टीन ने कहा कि वैश्विक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) रैंकिंग में भारत की बढ़त और सब्सिडी के बजाय बुनियादी ढांचे पर ध्यान ने वृद्धि को आधार दिया है, लेकिन वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है जहां आपूर्ति श्रृंखलाएं पुनर्गठित हो रही हैं और प्रौद्योगिकी व्यवधान तेज हो रहा है।
एक प्रमुख चिंता रोजगार है, खासकर तब जब ‘जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (जेन एआई) उस सेवा क्षेत्र के लिए खतरा बन रहा है जिसने दशकों तक भारत के मध्यम वर्ग को आगे बढ़ाया है।
बर्नस्टीन ने साथ ही यह भी सवाल उठाया कि क्या विनिर्माण क्षेत्र बड़े पैमाने पर विस्थापित श्रम को समायोजित कर सकता है। यह देखते हुए कि निजी पूंजीगत व्यय चयनात्मक बना हुआ है और बहुचर्चित ‘‘चीन+1’’ बदलाव को रोजगार में तब्दील होने में समय लग रहा है।
पत्र में कहा गया है, ‘‘ अंततः, कोई देश अपने लोगों को कहां और कैसे तैनात करता है, यही उसके दीर्घकालिक भविष्य को निर्धारित करता है।’’
इसमें कहा गया , ‘‘ क्या हमारी वृद्धि गाथा का अगला चरण अधिक इंजीनियर, उत्पाद निर्माताओं और नवप्रवर्तकों का सृजन करेगा, या यह मुख्य रूप से अधिक चालकों, डिलीवरी कर्मचारियों और घरेलू सहायकों का सृजन करेगा?’’
संरचनात्मक बाधाएं--
पत्र में कृषि को एक प्रमुख बाधा बताया गया, जहां लगभग 42-45 प्रतिशत कार्यबल केवल 15-16 प्रतिशत जीडीपी में योगदान देता है। इसमें कृषि कानूनों की वापसी के बावजूद सुधारों को फिर से शुरू करने, सिंचाई बढ़ाने और सब्सिडी पर निर्भरता कम करने की बात कही गई।
ऊर्जा के क्षेत्र में, ब्रोकरेज कंपनी ने बिजली वितरण में लगातार अक्षमताओं और आयातित कच्चे तेल पर भारी निर्भरता (जो लगभग 88 प्रतिशत मांग पूरी करता है) की ओर इशारा किया। इसमें आंतरिक दहन इंजन वाहनों से चरणबद्ध रूप से हटने सहित इलेक्ट्रिक परिवहन की ओर स्पष्ट बदलाव का आह्वान किया गया।