नई दिल्ली
मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक नए विकास चक्र की शुरुआत के कगार पर हो सकती है। इसे नीतिगत समर्थन, मज़बूत घरेलू मांग और कॉर्पोरेट कमाई में सुधार से बढ़ावा मिलेगा, भले ही भू-राजनीतिक जोखिम और वैश्विक अनिश्चितताएं मुख्य चुनौतियां बनी हुई हैं। अपनी नवीनतम 'इंडिया इक्विटी स्ट्रेटेजी प्लेबुक' रिपोर्ट में, मॉर्गन स्टेनली ने कहा, "विकास में तेज़ी आने की संभावना को देखते हुए, और मूल्यांकन तथा बाज़ार के रुझान (sentiment) अपने चरम के करीब होने के कारण, भारतीय शेयर बाज़ार के लिए आने वाला साल मज़बूत रहने की उम्मीद है।"
ब्रोकरेज फर्म ने बताया कि "छह तिमाहियों की मध्य-चक्र मंदी" के बाद कमाई में वृद्धि का रुख बदल रहा है। उम्मीद है कि RBI और सरकार की "दरों में कटौती, बैंकिंग नियमों में ढील और नकदी प्रवाह बढ़ाने जैसी पुनरुद्धार नीतियों" के कारण यह वृद्धि और तेज़ होगी। रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के बाद के सख़्ती वाले दौर से तुलना करें तो भारत के व्यापक आर्थिक माहौल में काफ़ी सुधार हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है, "कोविड के बाद भारत का जो सख़्त आर्थिक माहौल (hawkish macro set up) था—जिसके कारण भारतीय बाज़ार के प्रति निवेशकों में उदासीनता आ गई थी—अब वह स्थिति बदल गई है।"
मॉर्गन स्टेनली ने इस बात पर ज़ोर दिया कि "ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर, उर्वरक और डेटा केंद्रों" में बड़े पैमाने पर निवेश, साथ ही करों में कटौती और सहायक राजकोषीय नीतियों से विकास की गति को और मज़बूती मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया गया है। इसमें कहा गया है, "वास्तव में, 2025 में वैश्विक GDP वृद्धि में भारत का योगदान 18% था; आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और भी बढ़ने की संभावना है।"
हालांकि, इस वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने आगाह किया है कि 12 प्रतिशत की निरंतर नाममात्र वृद्धि (nominal growth) हासिल करने का रास्ता जोखिमों से पूरी तरह मुक्त नहीं होगा। रिपोर्ट में कहा गया है, "भू-राजनीतिक तनावों ने अभी-अभी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।" रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया है कि भले ही भारत की तेल पर निर्भरता (oil intensity) कम हुई है, "फिर भी उसे तेल आयात करने की ज़रूरत बनी हुई है।" मॉर्गन स्टेनली ने आगे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और बाहरी मांग से जुड़ी चिंताओं की ओर भी इशारा किया। रिपोर्ट में कहा गया है, "शेयर बाज़ार के लिए सबसे लगातार चुनौती यह प्रतीत होती है कि इसमें AI से जुड़ा कोई सीधा निवेश का अवसर (direct AI play) मौजूद नहीं है; इसके अलावा, भारतीय सेवा निर्यात के क्षेत्र में AI के कारण आने वाले संभावित व्यवधान (disruption) से स्थितियां और भी जटिल हो सकती हैं।"
इन चिंताओं के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म भारत के मध्यम-अवधि के भविष्य को लेकर आशावादी बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है, "हमें उम्मीद है कि एक 'बहु-ध्रुवीय दुनिया' (multi-polar world) में भारत को बड़ा फ़ायदा होगा, और आने वाले दशक में GDP में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है।" रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया है कि भारत की सबसे बड़ी ताक़त उसकी जनसांख्यिकी (demographics) और उपभोग क्षमता में निहित है। इसमें कहा गया है, "भारत की मुख्य ताकत उसका बढ़ता हुआ उपभोक्ता आधार है, जिसमें अपेक्षाकृत युवा आबादी की आय भी बढ़ रही है।" मॉर्गन स्टेनली को यह भी उम्मीद है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से होने वाले उत्पादकता लाभ से लंबे समय में भारत को फ़ायदा होगा। उसने कहा, "श्रम उत्पादकता के कम शुरुआती स्तर को देखते हुए, भारत AI से होने वाले उत्पादकता लाभ का एक प्रमुख लाभार्थी है।"