आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत तथा फिनलैंड ने चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में कारोबारी और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। दोनों देशों की कंपनियों ने संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और वृद्धि के अवसरों पर चर्चा की।
भारत चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (आईसीईएफ) 2026 के समापन दिवस पर शुक्रवार को नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बदलते आर्थिक संबंधों के बीच उभरते अवसरों पर विचार-विमर्श किया।
आईसीईएफ 2026, दो दिवसीय कार्यक्रम 20 से 21 अगस्त तक आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम गुजरात के गांधीनगर में सितंबर में प्रस्तावित विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (डब्ल्यूसीईएफ) 2026 की तैयारियों के रूप में था। डब्ल्यूसीईएफ दक्षिण एशिया में पहली बार आयोजित होने जा रहा है।
डब्ल्यूसीईएफ के अनुसार, ऐसी अर्थव्यवस्था में संसाधन कचरे में तब्दील नहीं होते और प्रकृति का पुनरुद्धार होता है। यह सीमित प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से आर्थिक गतिविधियों को अलग कर जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के नुकसान, कचरे और प्रदूषण जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद करती है।
कार्यक्रम के तहत शुक्रवार की चर्चा का विषय ‘‘मूल्य श्रृंखलाओं में सामंजस्य : भारत-ईयू व्यापार का नया दौर’’ था।