नई दिल्ली
इंडिया कार्बन समिट 2026 में बोलते हुए, भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद (ICFA) के कार्यकारी निदेशक और सीईओ श्री संजय सेठी ने कहा कि कार्बन बाजार की असली मुद्रा कार्बन नहीं, बल्कि विश्वास है।
एक सफल कार्बन बाजार पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के निर्माण में विश्वसनीयता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा:"भारत की महत्वाकांक्षा केवल दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन बाजार बनाने की नहीं होनी चाहिए, बल्कि दुनिया का सबसे विश्वसनीय कार्बन बाजार बनाने की होनी चाहिए। कार्बन वस्तु (Commodity) है, लेकिन विश्वास इसकी मुद्रा (Currency) है। जब कार्बन क्रेडिट को वैज्ञानिक अखंडता, पारदर्शी डेटा, मजबूत मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV), तथा सुदृढ़ प्रशासन का समर्थन प्राप्त होगा, तभी वे दीर्घकालिक जलवायु वित्त (Climate Finance) और वैश्विक विश्वास को आकर्षित कर पाएंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि भारत के पास नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उपग्रह-आधारित निगरानी और वैज्ञानिक उत्कृष्टता का लाभ उठाकर एक वैश्विक रूप से सम्मानित कार्बन बाजार बनाने का एक अनूठा अवसर है, जो उद्योग, किसानों और पर्यावरण सभी के लिए फायदेमंद होगा।
भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद (ICFA) ने नई दिल्ली में 'इंडिया कार्बन समिट 2026' का सफल आयोजन किया। इसमें 200 से 250 से अधिक नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के नेताओं, वित्तीय संस्थानों, कार्बन बाजार विशेषज्ञों, विकास भागीदारों, स्टार्टअप्स और किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया और "भारत की कार्बन अर्थव्यवस्था का निर्माण: बायोचार और प्रकृति-आधारित समाधान" विषय पर विचार-विमर्श किया।
यह शिखर सम्मेलन भारत में कार्बन बाजारों के भविष्य, जलवायु वित्त, बायोचार, प्रकृति-आधारित समाधानों और उभरती कार्बन अर्थव्यवस्था में किसानों की भागीदारी पर चर्चा करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा। चर्चा का मुख्य उद्देश्य एक अनुकूल नीति पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना, निवेश जुटाना और कम कार्बन वाले व जलवायु-अनुकूल भविष्य की ओर भारत के परिवर्तन को गति देने के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करना था।
डॉ. तरुण श्रीधर – पूर्व सचिव, पशुपालन और डेयरी विभाग, भारत सरकार एवं महानिदेशक, ICFA
डॉ. ए.के. नायक – उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), ICAR
श्री ताकायुकी हागीवारा – भारत प्रतिनिधि, FAO
पद्मश्री डॉ. पी.एल. गौतम – पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण तथा पौधे की किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण
डॉ. मारिया वेलेंटीना लासोरेला – विशेषज्ञ, कृषि अनुसंधान और अर्थव्यवस्था परिषद, इटली का दूतावास
श्री संजय सेठी – कार्यकारी निदेशक और सीईओ, ICFA
उद्घाटन सत्र का एक प्रमुख आकर्षण “फ्रेमवर्क फॉर कार्बन मार्केट टू ले द पाथ ऑफ डिकार्बोनाइजेशन” (Framework for Carbon Market to Lay the Path of Decarbonisation) शीर्षक वाली नीति रिपोर्ट जारी करना था। यह रिपोर्ट भारत के कार्बन बाजार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए सिफारिशें प्रस्तुत करती है।
शिखर सम्मेलन में चार उच्च-स्तरीय तकनीकी सत्र शामिल थे:
कार्बन मार्केट आर्किटेक्चर (Carbon Market Architecture)
प्रकृति-आधारित जलवायु समाधान (Nature-Based Climate Solutions)
बायोचार, जलवायु वित्त और कार्बन निवेश
किसानों को कार्बन बाजारों में जोड़ना और भारत की कार्बन अर्थव्यवस्था का भविष्य
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि किसानों और ग्रामीण समुदायों को कार्बन अर्थव्यवस्था से लाभ मिलना सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नीतिगत समर्थन, विश्वसनीय माप और सत्यापन प्रणाली, नवीन वित्तपोषण तंत्र, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और क्षमता निर्माण की आवश्यकता है।
इंडिया कार्बन समिट 2026 का समापन कार्बन बाजारों को आगे बढ़ाने, जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने और भारत को एक टिकाऊ व समावेशी कार्बन अर्थव्यवस्था के विकास में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।