गोयनका ने विक्रम-1 की सफलता को सराहा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 18-07-2026
IN-SPACe Chairman Goenka hails Vikram-1 orbital success, says mission achieved in first attempt
IN-SPACe Chairman Goenka hails Vikram-1 orbital success, says mission achieved in first attempt

 

श्रीहरिकोटा

भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 ने अपने पहले ही मिशन में सफलतापूर्वक कक्षा (ऑर्बिट) हासिल कर इतिहास रच दिया। लॉन्च के दौरान शुरुआती ऑटोमैटिक लॉन्च सीक्वेंस में मामूली तकनीकी दिक्कत आई, जिसे 35 मिनट में दूर कर मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

IN-SPACe के चेयरमैन पवन के. गोयनका ने कहा कि शुरुआती तकनीकी बाधा बेहद मामूली थी और उसे तुरंत ठीक कर लिया गया। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम की सराहना करते हुए कहा कि वर्षों की मेहनत का परिणाम है कि मिशन पहली ही कोशिश में सफल रहा।

स्काईरूट एयरोस्पेस के CEO और संस्थापक पवन कुमार चंदाना ने इसे भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने खुद ऑर्बिटल रॉकेट बनाया, लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया और सफल ऑर्बिटल मिशन पूरा किया। उन्होंने बताया कि 28 वर्ष की औसत आयु वाली टीम ने पूरी तरह कार्बन-कॉम्पोजिट से बने इस रॉकेट का निर्माण किया।

कंपनी के COO और सह-संस्थापक नागा भरत डाका ने कहा कि इस उपलब्धि के साथ भारत निजी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता रखने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है।

इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने भी स्काईरूट को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम की तेजी से बढ़ती क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि ऑटोमैटिक लॉन्च सीक्वेंस के दौरान ग्राउंड सिस्टम से ऑनबोर्ड कंप्यूटर में नियंत्रण हस्तांतरण के समय एक तकनीकी गड़बड़ी आई थी, जिसे 35 मिनट में ठीक कर लॉन्च दोबारा शुरू किया गया।

'मिशन आगमन' के तहत सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किए गए 24 मीटर लंबे विक्रम-1 ने सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए। तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल (OAM) से लैस इस रॉकेट ने करीब 450 किमी की लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में अपने पेलोड स्थापित किए।

इस मिशन में बेंगलुरु की कॉसमॉस डायमंड्स का लैब-ग्रोन 'डायमंड लोटस' भी अंतरिक्ष भेजा गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित "वंदे मातरम्" संदेश, स्काईरूट टीम, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनिया भर के शुभचिंतकों के हस्तलिखित संदेश भी इस ऐतिहासिक उड़ान का हिस्सा बने।