आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
गोवा विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत जेल के अंदर मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखना गैर-जमानती अपराध होगा और इसके लिए तीन साल तक की जेल तथा 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
गोवा कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विधेयक, 2026 के अनुसार, इस अपराध के लिए दी गई सजा उस सजा की अवधि पूरी होने के बाद शुरू होगी, जिसे कैदी पहले से भुगत रहा है। यह विधेयक मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया था।
प्रस्तावित कानून के अनुसार, संवेदनशील बैरकों और कोठरी में तैनात जेल कर्मचारियों का समय-समय पर तबादला किया जाएगा, ताकि कैदियों और कर्मचारियों के बीच किसी तरह का ‘‘गठजोड़’’ न बने और कामकाज में लापरवाही की स्थिति पैदा न हो।
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि गंभीर जोखिम वाले, कुख्यात या आदतन अपराधियों की सजा पूरी होने के बाद उनकी रिहाई की सूचना संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को दी जाएगी। इसी तरह जमानत पर रिहा किए गए विचाराधीन कैदियों तथा पैरोल या फरलो पर अस्थायी रूप से बाहर भेजे गए कैदियों की जानकारी भी संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक को दी जाएगी, ताकि उनकी निगरानी की जा सके।