Nepal-like floods are on the rise in the warming Himalayas due to climate change.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नेपाल के एक सुदूर गांव में पिछले सप्ताह जब पानी, चट्टानों और कीचड़ का सैलाब आया तो पेमा तामांग और उनके पड़ोसी पहाड़ी पर स्थित एक बौद्ध स्तूप की ओर भागे। इस स्तूप का 2015 के भूकंप में क्षतिग्रस्त होने के बाद पिछले साल ही पुनर्निर्माण किया गया था।
भूकंप की आशंका वाले हिमालय के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में पहाड़ी ग्लेशियरों के पिघलने के साथ अचानक आने वाली बाढ़ की घटनाएं अधिक लगातार हो रही हैं। इससे नदियों का स्वरूप कई बार बेहद तेजी से और भयावह तरीके से बदल रहा है। लोगों को एक आपदा के बाद दूसरी आपदा से उबरने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है, जिससे यह चिंता बढ़ रही है कि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार बढ़ने के साथ ये समुदाय कब तक टिक पाएंगे।
तामांग ने काठमांडू में एक मठ में बनाए गए अस्थायी आश्रय में ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, ‘‘भूकंप में नष्ट होने के बाद हमने पिछले साल ही स्तूप का पुनर्निर्माण किया था। बाढ़ से अपनी जान बचाने के लिए हमने उसी में शरण ली।’’