‘काश! मैंने मां से कैंटीन खोलने के लिए न कहा होता’: साकेत हादसे की शिकार महिला की बेटी का दर्द

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 01-06-2026
'I wish I hadn't asked my mother to open a canteen': The daughter of the Saket accident victim
'I wish I hadn't asked my mother to open a canteen': The daughter of the Saket accident victim

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में एक इमारत के ढहने से अपनी जान गंवाने वाली पार्वती की बेटी नीलम ने रुंधे गले से कहा, "मैंने ही मां से कैंटीन खोलने के लिए कहा था, लेकिन अब मुझे इस बात का बेहद अफसेास है।" इसके साथ ही उसने आरोप लगाया कि इमारत के जर्जर होने और उससे कंक्रीट गिरने की शिकायतें पहले भी की गई थीं।
 
साकेत मेट्रो स्टेशन के पास 30 मई की शाम एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत ढह गई थी, जिसमें एक कोचिंग सेंटर, कैफे और कई कार्यालय संचालित हो रहे थे। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। घटना के बाद राहत एवं बचाव दलों ने 24 घंटे से अधिक समय तक मलबे को हटाने और तलाशी के लिए अभियान चलाया।
 
'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में नीलम ने बताया कि इमारत के ढहने के संकेत मिलते ही उनकी मां सुरक्षित बाहर निकल आई थीं, लेकिन अंदर फंसे छात्रों की मदद करने के लिए वह दोबारा भीतर चली गईं।
 
पार्वती इस परिसर में एक कैंटीन चलाती थीं, जहां मुख्य रूप से आसपास के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र आते थे। नीलम ने बताया कि यह कैंटीन करीब तीन साल से संचालित हो रही थी और हाल ही में इसने चौथे साल में प्रवेश किया था।
 
भावुक नीलम ने कहा, "दरअसल, मेरा ही विचार था कि मां को वहां कैंटीन खोलनी चाहिए। अब मुझे इसका बहुत पछतावा हो रहा है।"
 
नीलम ने आरोप लगाया कि हादसे के शुरुआती घंटों में बचाव कार्य की गति काफी धीमी थी। उसने दावा किया कि अधिकारियों को बार-बार उस जगह की जानकारी दी गई जहां उनकी मां मलबे के नीचे दबी थीं।
 
उसने दावा किया कि पहले भी इमारत के कुछ हिस्सों से कंक्रीट के टुकड़े गिरते हुए देखे गए थे और इसकी जर्जर स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी।
 
इमारत के मालिक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नीलम ने कहा, "असली गलती मालिक की है। ऊपरी मंजिलों पर लगातार निर्माण किया जा रहा था और काम के दौरान कभी-कभार निर्माण सामग्री नीचे गिरती रहती थी।"
 
उसने बताया कि वे कैंटीन के लिए हर महीने एक लाख रुपये किराया दे रहे थे। पीड़ित परिवार ने अब सरकार से मुआवजे की मांग की है।
 
नीलम ने कहा, "मैं अपनी मां के लिए न्याय की लड़ाई लड़ूंगी। हमें मुआवजा चाहिए। वह कैंटीन के लिए एक लाख रुपये किराया देती थीं, उन्हें न्याय मिलना ही चाहिए।"