आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
शिक्षाविद् एवं जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लोगों से किसी और के नेतृत्व का इंतजार करने के बजाय अपने जीवन के ‘‘नायक’’ स्वयं बनने का आग्रह करते हुए कहा कि वह ‘‘सिर्फ एक सामान्य नागरिक’’ हैं, न कि ‘‘आधुनिक गांधी’’ या कोई नायक।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) का परीक्षाओं संबंधी कथित अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शनिवार को 22वें दिन भी जारी रहा। वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का यह 14वां दिन था।
संगठन की ओर से साझा की गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से वांगचुक का वजन साढ़े सात किलोग्राम कम हो गया है और उनका रक्तचाप 106/74 एमएम एचजी दर्ज किया गया।
वांगचुक ने शुक्रवार रात ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि वह पिछले दिन की तुलना में कम ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं लेकिन वह आंदोलन को लेकर प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आज मेरी भूख हड़ताल का 13वां दिन है। मुझे कल जितनी ऊर्जा महसूस नहीं हो रही है। थोड़ी थकान महसूस हो रही है। ऐसा होता है-कुछ दिन बेहतर महसूस होता है और कुछ दिन नहीं।’’
वांगचुक ने सोशल मीडिया पर आंदोलन का समर्थन करने के लिए लोगों का आभार जताते हुए कहा कि दो तरह की टिप्पणियों से उन्हें निराशा होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई लोग मुझे 21वीं सदी का गांधी या आधुनिक गांधी कहते हैं। कुछ लोग मुझे नायक कहते हैं। ऐसी टिप्पणियां मुझे असहज करती हैं। मैं न तो गांधी हूं और न ही कोई नायक। मैं सिर्फ एक सामान्य नागरिक हूं जिसने अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश की है।’’
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे किसी और में अपना नायक तलाशने के बजाय नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
वांगचुक ने कहा, ‘‘कृपया किसी और में नायक मत तलाशिए। अपने जीवन के नायक स्वयं बनिए। एक नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाइए।’’