Heritage and development are not competitors, but partners in nation-building: Goa CM Sawant
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने शुक्रवार को कहा कि ‘विकास भी, विरासत भी’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भारत का विकासात्मक दर्शन है। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र निर्माण में विरासत और विकास एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं
सावंत ने यहां आयोजित ‘गोवा वास्तुकला और स्थिरता पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि गोवा का लक्ष्य भारत की वास्तुकला की “जीवंत प्रयोगशाला” के रूप में काम करना है, जहां आधुनिक और पारंपरिक चीजें मिलकर सामंजस्य के साथ आगे बढ़ें।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य सदानंद शेट तानावडे भी मौजूद थे। सावंत ने वास्तुकारों से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में पर्यावरणीय नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन ने वास्तुकला की भूमिका को पूरी तरह बदल दिया है। अब डिजाइन से जुड़े हर फैसले का सीधा असर ऊर्जा की खपत, कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण की मजबूती पर पड़ता है। आज वास्तुकार केवल डिजाइन बनाने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरण के नेतृत्वकर्ता भी हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवा का समुद्री तट, जैव विविधता और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र ऐसी वास्तुकला की मांग करते हैं, जो समझदारी भरी, मजबूत व पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हो।