Gujarat leads in renewable energy with 50.386 GW total RE capacity; 15850.56 MW wind, 32302.7 MW solar power
नई दिल्ली
विश्व ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस (10 जुलाई) से पहले गुजरात ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य 50.386 गीगावाट (GW) की कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ देश में पहले स्थान पर है। गुजरात पवन ऊर्जा क्षमता (15,850.56 मेगावाट) में भी शीर्ष पर है, जबकि 13 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन (7,408.10 मेगावाट) के साथ भी नंबर-1 है। वहीं, 32,302.7 मेगावाट स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के साथ राज्य दूसरे स्थान पर है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2006 में शुरू किया गया विश्व ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था को बढ़ावा देने का संदेश देता है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लिए वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है और 2030 तक देश की 50 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 17.82 प्रतिशत योगदान के साथ सबसे बड़ा हिस्सा हासिल किया है। मई 2026 तक राज्य की कुल सौर ऊर्जा क्षमता 32,302.7 मेगावाट हो गई है, जिसमें 23,259.27 मेगावाट ग्राउंड-माउंटेड परियोजनाओं, 7,408.10 मेगावाट रूफटॉप सोलर, 1,434.66 मेगावाट हाइब्रिड परियोजनाओं और 200.48 मेगावाट ऑफ-ग्रिड प्रणालियों से प्राप्त हो रही है।
राज्य के प्रमुख सौर पार्कों में चारणका (749 मेगावाट), राधानेसदा (700 मेगावाट) और धोलेरा (300 मेगावाट) शामिल हैं। कच्छ में विकसित हो रहा खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, जिसकी कुल प्रस्तावित क्षमता 37.35 गीगावाट है, मई 2026 तक 15.54 गीगावाट क्षमता हासिल कर दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क बन चुका है।
गुजरात ने 13 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन स्थापित किए हैं, जो देश के कुल रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का 21 प्रतिशत से अधिक है। कृषि क्षेत्र में भी पीएम-कुसुम योजना के तहत 22,792 ऑफ-ग्रिड सोलर वाटर पंप लगाए गए हैं।
पवन ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात लंबे समय से अग्रणी रहा है। मई 2026 तक राज्य की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 15,850.56 मेगावाट पहुंच गई है। इसमें अकेले कच्छ जिले का योगदान 8,191.42 मेगावाट है। इसके अलावा जामनगर, देवभूमि द्वारका, अमरेली, राजकोट, भावनगर, मोरबी, सुरेंद्रनगर और पाटन भी प्रमुख पवन ऊर्जा केंद्र हैं।
राज्य सरकार ने 2018 की विंड-सोलर हाइब्रिड नीति और गुजरात रिन्यूएबल एनर्जी नीति-2023 के तहत 2,838.07 मेगावाट की हाइब्रिड परियोजनाएं भी शुरू की हैं। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की प्रगति से अनुमानित 2.37 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। ग्रिड कनेक्टिविटी के लिए 'अक्षय ऊर्जा सेतु' ऑनलाइन पोर्टल और नेट-मीटरिंग व्यवस्था ने परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गुजरात की ऊर्जा नीति को और मजबूत बनाने के लिए राज्य ने 1993 की पहली विंड पावर पॉलिसी से लेकर सोलर पावर पॉलिसी, विंड-सोलर हाइब्रिड पॉलिसी, वेस्ट-टू-एनर्जी पॉलिसी और गुजरात इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2025 जैसी कई पहलें लागू की हैं। नई नीति में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), ग्रुप और वर्चुअल नेट-मीटरिंग, डिजिटल सुविधा, हरित रोजगार और उभरती तकनीकों को भी बढ़ावा दिया गया है।
मई 2026 तक राज्य में 1,531 नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनकी कुल क्षमता 12.159 गीगावाट है। इनमें 1,320 सौर, 115 पवन और 96 हाइब्रिड परियोजनाएं शामिल हैं।
गांधीनगर में आयोजित RE-INVEST 2024 सम्मेलन में गुजरात ने वर्ष 2030 तक 105 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिससे भारत के 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य में लगभग 20 प्रतिशत योगदान देने की योजना है।