ग्रीक फायर: पूर्वी रोमन साम्राज्य का सबसे विनाशकारी हथियार, लेकिन आखिर यह था क्या?

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 20-07-2026
Greek Fire: The Eastern Roman Empire's Most Destructive Weapon, But What Was It?
Greek Fire: The Eastern Roman Empire's Most Destructive Weapon, But What Was It?

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
आधुनिक काल के सामूहिक विनाश के हथियारों से बहुत पहले एक ऐसा हथियार था, जिसे ‘ग्रीक फायर’ (इग्निस ग्रेकस) के नाम से जाना जाता है। मध्यकालीन धर्मयुद्ध के दौरान यूरोपीय योद्धाओं ने यह नाम बीजान्टिन (पूर्वी रोमन) साम्राज्य के उन अग्नि-अस्त्रों को दिया था जिनका इस्तेमाल लगभग 673 ईस्वी से लेकर कम-से-कम 1180 के दशक तक पूर्वी भूमध्यसागर में नौसैनिक युद्धों में किया गया।
 
ग्रीक फायर का सूत्र इतना गोपनीय रखा गया था कि 1453 में बीजान्टिन साम्राज्य के ओटोमन साम्राज्य के हाथों पतन के साथ ही इसका रहस्य भी हमेशा के लिए खो गया।
 
तब से लेकर आज तक अनेक रसायनविद, इतिहासकार, वैज्ञानिक और प्रायोगिक पुरातत्वविद इस रहस्यमयी हथियार का वास्तविक सूत्र जानने की कोशिश करते रहे हैं।
 
तो आखिर इस गुप्त ‘महाअस्त्र’ के बारे में हम वास्तव में क्या जानते हैं?
 
गुप्त हथियार का इस्तेमाल कैसे होता था?
 
ग्रीक फायर एक ज्वलनशील तरल पदार्थ था, जिसे बीजान्टिन युद्धपोतों के अगले हिस्से पर लगी पीतल या कांसे की नली (साइफन) के माध्यम से दुश्मन के जहाजों पर फेंका जाता था।
 
यह तरल जिस सतह पर गिरता, उससे चिपक जाता था। यहां तक कि पानी पर भी यह जलता रहता था और उसे बुझाना लगभग असंभव था। नेपाम (नैप्थालीन और नारियल के तेल से बना पदार्थ) की तरह काम करने वाला यह हथियार बीजान्टिन नौसेना को अपने दुश्मनों पर बड़ा सामरिक लाभ देता था।
 
सातवीं शताब्दी में उभरती हुई अरब शक्ति की समुद्री ताकत ने बीजान्टिन साम्राज्य के सामने नयी चुनौतियां खड़ी कर दी थीं।
 
अरबों की नौसैनिक तकनीक, विशेषकर त्रिकोणीय पाल 'लेटीन सेल', जहाजों को हवा की दिशा के अनुरूप आगे बढ़ने और अधिक फुर्ती से संचालन करने में सक्षम बनाती थी। ऐसे समय में ग्रीक फायर बीजान्टिन साम्राज्य के लिए निर्णायक हथियार बनकर उभरा।
 
बीजान्टिन सम्राट हमेशा से ही स्वयं को ईश्वरीय प्रेरणा से प्राप्त तकनीकों का संरक्षक बताकर अपनी राजनीतिक और सांस्कृतिक श्रेष्ठता स्थापित करना चाहते थे।
 
इस हथियार का उल्लेख नौवीं शताब्दी के इतिहासकार और भिक्षु थियोफेन्स द कन्फेसर ने किया है। उनके अनुसार, इसका आविष्कार सीरिया के हेलियोपोलिस के यहूदी वास्तुकार कैलीनिकोस ने किया था, जिसे मुस्लिम सेनाओं के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा था।
 
थियोफेन्स के अनुसार, इस हथियार, जिसे उन्होंने 'सी फायर' (समुद्री अग्नि) कहा, का सफल इस्तेमाल लगभग 673 ईस्वी में सिजिकस के युद्ध के दौरान, बीजान्टिन साम्राज्य की राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल की नाकाबंदी कर रहे अरब बेड़े को नष्ट करने में किया गया था।