Govt issues ordinance to exempt FIIs from capital gains tax on Government Securities
नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने इनकम-टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 जारी किया है। इसके तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) में निवेश से होने वाले कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) और ब्याज से होने वाली आय पर टैक्स छूट दी गई है। शुक्रवार को भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित यह अध्यादेश, इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 में संशोधन करता है। इसे 1 अप्रैल, 2026 से पिछली तारीख (retrospectively) से लागू किया गया है।
नोटिफिकेशन के अनुसार, "सरकारी प्रतिभूति पर मिलने वाला कोई भी ब्याज, और ऐसी सरकारी प्रतिभूति की बिक्री, अदला-बदली या ट्रांसफर से होने वाला कोई भी कैपिटल गेन" "विदेशी संस्थागत निवेशक" के मामले में टैक्स-फ्री होगा। हालांकि, इस छूट के साथ अनुपालन (compliance) की एक शर्त भी जुड़ी है। गजट में कहा गया है कि "ऐसी छूट उस जानकारी को तय फॉर्म और तरीके से देने पर ही मिलेगी, जैसा कि निर्धारित किया जाएगा।"
यह अध्यादेश 'बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स' (BIS) को भी इसी तरह की छूट देता है। इसमें शामिल प्रावधान BIS द्वारा कमाई गई "सरकारी प्रतिभूति पर मिलने वाले किसी भी ब्याज और ऐसी सरकारी प्रतिभूति की बिक्री, अदला-बदली या ट्रांसफर से होने वाले किसी भी कैपिटल गेन" को छूट देता है। इसके अलावा, नोटिफिकेशन में छूट के दायरे में आने वाली संस्थाओं को परिभाषित करने के लिए एक नया 'नोट 4' जोड़ा गया है। यह स्पष्ट करता है कि "विदेशी संस्थागत निवेशक" का वही अर्थ होगा जो इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 210(6)(a) में बताया गया है।
अध्यादेश यह भी स्पष्ट करता है कि "सरकारी प्रतिभूति" का वही अर्थ होगा जो सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 की धारा 2(f) में बताया गया है। इस कदम से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से जुड़ी टैक्स लागत को हटाकर विदेशी निवेशकों के लिए भारत के सॉवरेन डेट मार्केट (सरकारी कर्ज बाजार) को और आकर्षक बनाने की उम्मीद है।
वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और निवेश की बदलती प्राथमिकताओं के बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 2026 में अब तक भारत से कुल 2,63,784 करोड़ रुपये निकाले हैं। यह संशोधन अध्यादेश के जरिए किया गया है क्योंकि संसद का सत्र नहीं चल रहा है। इनकम-टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को 1 अप्रैल, 2026 से लागू माना जाएगा।